चिन्तामणि जोशी की कविताएँ

चिन्तामणि जोशी चिन्तामणि जोशी जन्म   : 3 जुलाई 1967 , ग्राम – बड़ालू, पिथौरागढ (उत्तराखण्ड) शिक्षा   : एम. ए. (अंग्रेजी), बी. एड. प्रकाशन : ‘दैनिक जागरण’, ‘अमर उजाला’, ‘कृति ओर’, ‘गाथांतर’, ‘अटूट बंधन’ तथा          अन्य हिन्दी की पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ, लेख प्रकाशित प्रकाशित पुस्तक  : ‘क्षितिज की ओर’ (कविता-संग्रह)- 2013 संपादन  : ‘कुमांयू […]

रूचि भल्ला का संस्मरण ‘नदी में उतरती संध्या को देख कर… …’

रूचि भल्ला संस्मरणों के बहाने हम अपने उस अतीत की सैर करते हैं जिसमें हम खुद शामिल होते हैं। खुद के बहाने खुद से बातें करते हुए। रूचि भल्ला एक कवयित्री हैं जो डायरी लेखन के साथ-साथ आजकल संस्मरण भी लिख रही हैं। रूचि के इन संस्मरणों को पढ़ते हुए जैसे लगता है हम काव्यगत […]

रमेश प्रजापति के कविता संग्रह ‘शून्य काल में बजता झुनझुना’ पर राहुल देव की समीक्षा

पिछले दिनों युवा कवि रमेश प्रजापति का एक नया कविता संग्रह प्रकाशित हुआ है – ‘शून्य काल में बजता झुनझुना’। लम्बे अंतराल के बाद आया रमेश का यह संग्रह उनकी काव्य-यात्रा के विकास को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है। कवि किसी हडबडी में नहीं है। वह अपने समय और समाज को गौर से देखते […]

अनिल जनविजय का आलेख ‘लेफ़ तलस्तोय की प्रेम कहानी’

लेफ़ तलस्तोय प्रेम मानव जीवन की सघनतम अनुभूति है। शारीरिक से ज्यादा मानसिक अनुभूति, जिससे प्रभावित हो हम इसे महसूस ही नहीं करते कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार हो जाते हैं। दुनिया के महानतम लेखकों में से एक लेफ तलस्तोय ने भी एक लडकी से प्रेम किया था। इस प्रेम कहानी पर अनिल […]

युवाल नोह हरारी का व्याख्यान ‘क्यों करते हैं इंसान धरती पर राज’

युवाल नोह हरारी   अक्सर यह सवाल मन में उठता रहा है कि आखिर मनुष्य क्यों दुनिया का सर्वोत्तम प्राणी है और क्यों धरती पर राज कर रहा है। इस्रायल के इतिहासकार युवाल नोह हरारी ने इन सवालों के दिलचस्प और तर्कपूर्ण उत्तर खोजने की कोशिश की है। इसी क्रम में आज हरारी के लन्दन […]

प्रतुल जोशी का आलेख ‘कुछ जगबीती, कुछ आप बीती : “प्रतिरोध का सिनेमा” के दस वर्ष’

बालीवुड के बौद्धिक दिवालियेपन से निराश लोगों के लिए उम्मीद की किरण है – ‘प्रतिरोध का सिनेमा’। संजय जोशी ने ‘प्रतिरोध के सिनेमा’ की शुरुआत एक सामाजिक-सांस्कृतिक के रूप में की थी जो अब एक आन्दोलन का रूप ले चुकी है। गोरखपुर में सन् 2006 से छोटी सी शुरुआत करने वाले उनके ग्रुप को भी […]

बेर्टोल्ट ब्रेष्ट की प्रेम कविताएँ (मूल जर्मन से अनुवाद – प्रतिभा उपाध्याय)

बेर्टोल्ट ब्रेष्ट बेर्टोल्ट ब्रेष्ट मेरे प्रिय कवियों में से एक हैं। ब्रेष्ट का समय दुनिया के लिए एक त्रासद समय था। अपनी रचनाओं के द्वारा वे उस त्रासदी से संघर्ष करते हुए लोगों को उत्प्रेरित करते रहे। एक बेहतरीन नाटककार होने के साथ-साथ वे एक बेजोड़ कवि भी थे। खुद उनकी कविताएँ बता देती हैं […]

बलभद्र की किताब पर सुमन कुमार सिंह की समीक्षा ‘कब कहलीं हम : समय पर समय का सच’

                   कवि एवं आलोचक बलभद्र का भोजपुरी में एक नया कविता संग्रह आया है ‘कब कहलीं हम’। हिन्दी में लिखने के बावजूद बलभद्र को ऊर्जा उनकी अपनी बोली-बानी भोजपुरी से मिलती है। बलभद्र मूलतः गंवई संवेदना या और स्पष्ट कहें तो किसान संवेदना के कवि हैं। गंवई संवेदना जिसमें सहकारिता है। जहाँ पर मन में सबके […]

सिंजू पी. वि. का आलेख ‘कहानीकार मार्कण्डेय : किसानों एवं खेतिहर मज़दूरों के तरफदार’

मार्कण्डेय जी भारत एक कृषि प्रधान देश है। यह जुमला हम बचपन से ही सुनते आए हैं। आज भी यदा-कदा इस जुमले को दोहराया जाता है। यह सच्चाई है कि कृषि में औद्योगीकरण और सेवा क्षेत्र से अधिक लोग आज भी लगे हुए हैं। यह अलग बात है कि किसानों की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती […]

हिमांगी त्रिपाठी का आलेख ‘सेमल के फूल : एक असमाप्त प्रेम कथा’

मार्कण्डेय जी मार्कण्डेय जी की ख्याति आम तौर पर एक कहानीकार की है लेकिन हमें यह भी याद रखना होगा कि उन्होंने हिन्दी साहित्य की अधिकतर विधाओं में अपने हाथ आजमाए और वे इसमें प्रायः सफल भी रहे। अपनी रचनाधर्मिता के शुरुआती दिनों में मार्कण्डेय जी ने एक लम्बी कहानी लिखी ‘सेमल के फूल’। हालांकि […]