हेरम्ब चतुर्वेदी का आलेख ‘इलाहाबाद में पत्रकारिता का विकास: एक ऐतिहासिक सर्वेक्षण (१८६५-१९४७)’

प्रोफ़ेसर हेरम्ब चतुर्वेदी अकबर इलाहाबादी का यह शेर काफी मक़बूल है – ‘खींचो न कमानों को न तलवार निकालो, जब तोप मुक़ाबिल हो तो अखबार निकालो।’ संयोगवश वे जिस इलाहाबाद के थे वहाँ की पत्रकारिता का न केवल प्रांतीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आज़ादी के आन्दोलन में इलाहाबाद की पत्रकारिता ने […]

सुधीर सक्सेना के संग्रह पर उमाशंकर सिंह परमार की समीक्षा “धूसर में बिलासपुर : गुमशुदा मूल्यों की तलाश।“

उमाशंकर सिंह परमार कवियों के लिए लम्बी कविता लिखना हमेशा चुनौती भरा होता है। न केवल विषय एवं कथ्य के स्तर पर बल्कि शिल्प और प्रवहमानता के स्तर पर भी। ‘गद्य’ में हाथ आजमाने की तरह ही लम्बी कविता लिखना भी कवि के लिए उसका निकष होता है। सुपरिचित कवि सुधीर सक्सेना ने अभी हाल […]

संदीप मील के कहानी संग्रह ‘दूजी मीरा’ पर अजीत प्रियदर्शी की समीक्षा

संदीप मील आज के समय में कहानी लेखन के क्षेत्र में काम कर रहे कहानीकारों में युवा कहानीकार संदीप मील एक उम्मीद भरा नाम है। उनकी कहानियों में किस्सागोई के साथ-साथ जीवन की महीन बुनावटों को उद्घाटित करने का सफल प्रयास मिलता है। ये ऐसी बुनावटें हैं जो निरंतर हमारे इर्द-गिर्द चलती रहती हैं, और […]

वसुधा डालमिया का आलेख ‘औपनिवेशिक भारत में परम्परा का संघटन : हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान; अनुवाद -संजीव कुमार

वसुधा डालमिया आज अलग अर्थों में ‘राष्ट्रवाद’ और ‘हिन्दू’ शब्द बड़ी चर्चा में है। इस पहचान को एक कट्टरवादी तबका इन दिनों अपनी संकीर्णता में व्याख्यायित करने की कोशिशें कर रहा है। यह जाने बगैर कि राष्ट्रवाद की अवधारणा बिलकुल आधुनिक यूरोपीय अवधारणा है। और हिन्दू शब्द भी उन अर्थों में प्रयुक्त तो नहीं ही […]

राकेश रोहित की कविताएँ

राकेश रोहित नाम : राकेश रोहित जन्म : 19 जून 1971 (जमालपुर). संपूर्ण शिक्षा कटिहार (बिहार) में. शिक्षा : स्नातकोत्तर (भौतिकी). कहानी, कविता एवं आलोचना में रूचि. पहली कहानी “शहर में कैबरे” ‘हंस‘ पत्रिका में प्रकाशित. “हिंदी कहानी की रचनात्मक चिंताएं” आलोचनात्मक लेख शिनाख्त पुस्तिका एक के रूप में प्रकाशित और चर्चित. राष्ट्रीय स्तर की […]

अजय कुमार पाण्डेय के कविता संग्रह ‘यही दुनिया है पर शशिभूषण मिश्र द्वारा लिखी गयी समीक्षा

अजय पाण्डेय युवा कवि अजय कुमार पाण्डेय कुछ उन कवियों में से हैं जो चुपचाप अपना काम करने में विश्वास करते हैं। वे कविता के साथ-साथ जीवन में भी ईमानदारी बरते जाने के पक्षधर हैं। इसीलिए उनकी कविताओं में सघनता और तरलता है। इन कविताओं में जो पैनापन है वह हमारा ध्यान अनायास ही अपनी […]

बृजेश नीरज की कविताएँ

बृजेश नीरज नाम- बृजेश नीरज पिता- स्व0 जगदीश नारायण सिंह गौतम माता- स्व0 अवध राजी जन्मतिथि- 19-08-1966 सम्प्रति- उ0प्र0 सरकार की सेवा में कार्यरत कविता संग्रह- ‘कोहरा सूरज धूप’  संपादन- साझा कविता संकलन– ‘सारांश समय का’ समय के बदलते सन्दर्भों के साथ-साथ कविता की भूमिका भी बदली है. अब वह महज नख-शिख वर्णन नहीं बल्कि […]

हारुकी मुराकामी की अनुदित जापानी कहानी ‘आईना’, अनुवाद – सुशांत सुप्रिय

हारुकी मुराकामी सुशान्त सुप्रिय न केवल एक कवि हैं बल्कि वे एक बेहतर अनुवादक भी हैं। सुशान्त जी ने विश्व के अनेक साहित्यकारों की रचनाओं को हिन्दी में अनुदित कर हिन्दी के पाठकों को उससे परिचित करने का एक बड़ा काम किया है। आज हम उनकी एक जापानी अनुदित कहानी प्रस्तुत कर रहे हैं जो […]

कैलाश बनवासी के उपन्यास ‘लौटना नहीं है’ पर विनोद तिवारी की समीक्षा ‘समाज का बंद घेरा बहुत मजबूत होता है’

कैलाश बनवासी कैलाश बनवासी का एक महत्वपूर्ण उपन्यास आया है ‘लौटना नहीं है। यह उपन्यास इस मायने में अहम् है कि आज के निम्नमध्यम वर्गीय स्त्री जीवन की पड़ताल करने के साथ-साथ इन स्त्रियों में अपने जीवन के प्रति आयी चेतना को भी बखूबी सामने रखा है। जिस पल उपन्यास की नायिका गौरी यह निश्चय […]

मिथलेश शरण चौबे की कविताएँ

मिथलेश शरण चौबे परिचय  13 दिसम्बर 1976 को गढ़ाकोटा (जिला-सागर) मध्यप्रदेश में जन्म। डॉ. हरी सिंह गौर विश्वविद्यालय सागर से हिंदी में स्नातकोत्तर व पी-एच. डी.। वहीं हिंदी विभाग में दस वर्षों तक बतौर अस्थायी शिक्षक अध्यापन के पश्चात् इन दिनों इसी रूप में क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (एन.सी.ई.आर.टी.) भोपाल में कार्यरत। रज़ा फाउंडेशन, नयी दिल्ली  […]