सौरभ शेखर का आलेख ‘प्रकृति, जो आत्मा को बचाए रखती है..’

आलोक धन्वा सौरभ शेखर जन्म: 7 जनवरी, 1977, मुज़फ्फ़रपुर, बिहार शिक्षा: एम. ए. (अंग्रेजी साहित्य) ·        युवा आलोचक, कवि और ग़ज़लकार ·        विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं, अखबारों के लिए नियमित अनुवाद और लेखन. ·        राज्य सभा सचिवालय, दिल्ली में उप निदेशक के तौर पर कार्यरत.   प्रकृति से कविता का अत्यन्त पुरातन नाता है। यह प्रकृति से […]

निर्मला तोंदी की कविताएँ

निर्मला तोंदी कवयित्री निर्मला तोंदी ने चर्चित पत्रिका ‘सदानीरा’ में छपने के लिए अपनी कुछ कविताएँ भेजीं थीं. वे कविताएँ उस पत्रिका में प्रकाशित भी हुईं लेकिन सम्पादित रूप में. निर्मला जी को इस पर आपत्ति थी. इसी आपत्ति को ले कर उन्होंने सम्पादक को पत्र लिखा जिसे आग्नेय जी ने अपनी पत्रिका में यथावत […]

स्वाती ठाकुर का आलेख ‘मैडम क्यूरी’

मैडम क्यूरी हिन्दी में विज्ञानपरक उत्कृष्ट लेखों की आज भी बहुत कमी है। हाल ही में जब मेरी नजर ‘अहा ज़िंदगी’ पत्रिका के पन्नों पर पड़ी तो उस जगह जा कर टिक गयी जहाँ पर मैडम क्यूरी के बारे में स्वाती ठाकुर का विस्तृत आलेख छपा था। मैंने तत्काल ही स्वाती जी से पहली बार […]

चैतन्य नागर का आलेख ‘…बुरा न मिलिया कोय’

चैतन्य नागर पिछले दिनों सहिष्णुता-असहिष्णुता के सवाल पर काफी बातें-बहसें होतीं रहीं। इस मुद्दे पर सबका अपना-अपना पक्ष था। युवा विचारक चैतन्य नागर ने इस सहिष्णुता-असहिष्णुता के मुद्दे पर एक गंभीर एवं चिंतनपरक आलेख लिखा है। इसके माध्यम से उन्होंने इसे एक नए दृष्टिकोण से  सोचने का प्रयास किया है। तो आइए पढ़ते हैं चैतन्य […]

सुशील कुमार का आलेख ‘कविता की आलोचना का अर्थ और कवि की आत्ममुग्धता के खतरे’

सुशील कुमार     कोई रचना कभी भी आलोचना से परे नहीं होती। लेकिन यह भी आज आसान नहीं। समय की जटिलताओं के साथ-साथ मन-मस्तिष्क की जटिलता भी बढी है। हमें अपनी रचना की बड़ाई तो बढ़िया लगती है लेकिन हम किसी की आलोचना के एक शब्द तक को पचा नहीं पाते। आत्म-मुग्धता हममें इतना […]

हरियश राय की कहानी ‘भँवर में…’

हरियश राय ‘दुनिया इन दिनों’ की साहित्य वार्षिकी-1 में हरियश राय की एक कहानी छपी है – ‘भँवर में…’। कहना न होगा कि यह कहानी वर्तमान सन्दर्भों में भी काफी सामयिक है। तो आइए पढ़ते हैं हरियश राय की यह ताजातरीन कहानी।    भँवर में … हरियश राय चाहता तो वह गूगल के जनक सरगै […]

आशीष अनचिन्हार का व्यंग्य ‘गुट निरपेक्ष’

आशीष अनचिन्हार मूल नाम– आशीष कुमार मिश्र जन्म–4/12/1985 मैथिली गजल एवं शेरो-शाइरी पर केंद्रित इंटरनेट पत्रिका (ब्लाग रूप मे) “अनचिन्हार आखर” http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ के संस्थापक और संपादक। प्रकाशित कृति— (1). अनचिन्हार आखर (गजल संग्रह) (2). मैथिली गजलक व्याकरण ओ इतिहास (मैथिली गजल का व्याकरण और इतिहास) सह-संपादित कृति– (1). मैथिली गजल: आगमन ओ प्रस्थान बिंदु (मैथिली […]

वैभव सिंह का आलेख ‘गढ़ाकोला में दिखे उदास निराला’

सूर्यकान्त त्रिपाठी आज वसंत पंचमी है। वसंत पंचमी का दिन महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म दिन भी है। हाल ही में युवा आलोचक वैभव सिंह उनके पैतृक गांव उन्नाव के गढ़ाकोला गए थे। गढ़ाकोला से लौट कर वहाँ की दशा-दुर्दशा पर युवा आलोचक वैभव ने एक आलेख लिखा है। वसंतपंचमी की बधाई देते हुए […]

नताशा की कविताएँ

नताशा परिचयजन्म –  22 जुलाई 1982 (बिहार)शिक्षा – एम. ए. हिन्दी साहित्य, (पटना वि.वि.) बी. एड रचनाएंप्रकाशन  -कथादेश, पाखी वागर्थ, पुनर्नवा, अलाव, गुंजन, संयोग-साहित्य, संवदिया, जनपथ, साहित्य अमृत, सृजन-लोक, हिंदुस्तान, दैनिक जागरण, प्रभात खबर इत्यादि पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं,  प्रकाशित दूरदर्शन तथा आकाशवाणी से रचनाएं प्रसारित नताशा उम्मीद की कवयित्री हैं. वे जानती हैं कि इस उम्मीद के भविष्य को हमें न […]

प्रकाश का आलेख ‘प्रेम में देह, देह में प्रेम’

प्रकाश विगत 21 अगस्त 2015 को जब हमने प्रकाश का एक आलेख ‘प्रेम और मृत्यु (कविता) में क्या होता है?’ पहली बार पर प्रकाशित किया था  तब हमें यह पता नहीं था कि वे किन अवसादों से गुजर रहे हैं और हाल में इसकी क्या परिणति होने वाली है। हाल ही में जब उन्होंने अपना […]