हरिवंशराय बच्चन की नव वर्ष पर कविताएँ

आज वर्ष 2015 के अन्तिम महीने का अन्तिम दिन है. कल से हम एक नए साल की नयी रोशनी में होंगे. लगभग इतिहास बन चुका यह वर्ष इस मायने में अहम् रहा कि भारत के इतिहास में पहली बार साहित्यकर्मियों, संस्कृतिकर्मियों, फिल्मकारों, वैज्ञानिकों और इतिहासकारों ने आगे बढ़ कर फासीवाद, कट्टरता और साम्प्रदायिकता के विरुद्ध […]

कैलाश बनवासी की कहानी ‘बस के खेल और चार्ली चैप्लिन’

कैलाश बनवासी निश्चित रूप से आज के दौर हम तकनीकी रूप से सबसे अधिक समृद्ध हैं। सोशल मीडिया पर अत्यन्त सक्रिय भी। लेकिन यह भी एक कड़वी हकीकत है कि हम संवेदना के स्तर पर लगातार पिछड़ते चले जा रहे हैं। मुझे तो इस बात का डर है कि आगे के दिनों में संवेदना महज […]

अमरेन्द्र कुमार शर्मा की कविताएँ

अमरेन्द्र कुमार शर्मा                     कवि, आलोचक अमरेन्द्र कुमार शर्मा का जन्म 1 जनवरी 1975 को हुआ. आलोचना की इनकी दो पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं –  ‘आपातकाल : हिंदी साहित्य और पत्रकारिता‘ और ‘आलोचना का स्वराज‘  काव्य-संग्रह प्रकाशनाधीन दर्जनों पत्रिकाओं और अख़बारों में कविता और आलोचना लेख प्रकाशित.   साहित्य के साथ कला माध्यमों और सामाजिक […]

कालीचरण सिंह राजपूत की गज़लें

कालीचरण सिंह राजपूत परिचय   कालीचरण सिंह राजपूत पिता का नाम – श्री सुन्दर लाल सिंह जन्मतिथि—14-07-1978   शैक्षिक योग्यता – बी. एस-सी., बी. एड. सम्प्रति उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद में सहायक अध्यापक   विकीपीडिया का सहारा ले कर कहें तो मूलतः अरबी भाषा के ग़ज़ल शब्द का अर्थ भले ही ‘औरतों से या […]

शम्भु गुप्त का आलेख ‘हिन्दी में सभ्यता-समीक्षा का विरल उदाहरण: उदय प्रकाश’

उदय प्रकाश उदय प्रकाश ने कविता एवं कहानी के साथ-साथ प्रचुर मात्रा में सृजनात्मक लेखन भी किया है। उनके इस सृजनात्मक लेखन पर एक विहंगम दृष्टि डालने का प्रयास किया है शम्भु गुप्त ने। तो आइए पढ़ते हैं शम्भु गुप्त का यह आलेख ‘हिन्दी में सभ्यता-समीक्षा का विरल उदाहरण: उदय प्रकाश।’ हिन्दी में सभ्यता-समीक्षा का […]

उमाशंकर सिंह परमार का आलेख ‘“बुझे चिराग जलाओ, बहुत अँधेरा है”

महेश चन्द्र पुनेठा युवा कवियों में महेश चन्द्र पुनेठा अपनी अलग तरह के कहन और व्यंजना के लिए जाने जाते हैं। वे कुछ उन दुर्लभ कवियों में से हैं जिनके व्यवहार और सिद्धान्त में आपको कोई फांक नहीं दिखायी पड़ेगी। उनकी कविताएँ पढ़ते हुए हम यह बराबर महसूस भी करते हैं। महेश की कविताओं पर […]

प्रेमनन्दन की कविताएँ

प्रेम नन्दन जन्म – 25 दिसम्बर 1980, फरीदपुर, हुसेनगंज, फतेहपुर (उ0प्र0) शिक्षा – एम0ए0 (हिन्दी), बी0 एड0। लेखन – कविता, लघुकथा, कहानी, व्यंग्य, समसामायिक लेख आदि। परिचय – लेखन और आजीविका की शुरुआत पत्रकारिता से। दो–तीन वर्षों तक पत्रकारिता करने तथा कुछ वर्षों तक इधर-उधर ’भटकने‘ के पश्चात सम्प्रति अध्यापन। प्रकाशन – कवितायें, कहानियां, लघु कथायें एवं समसामायिक लेख आदि का लेखन एवं विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं एवं blब्लॉग्स में […]

राकेश रोहित का आलेख संवेदनाओं के द्वीप और विभ्रम की उलझनें

राकेश रोहित किसी भी कवि की वास्तविक पहचान उसके गद्य से होती है. कवियों द्वारा गद्य लिखने की हमारे यहाँ एक समृद्ध परम्परा रही है. निराला हों, मुक्तिबोध या फिर नागार्जुन सबने कविताओं के साथ-साथ प्रचुर गद्य भी लिखा है. यह परम्परा हमारे समय में भी कायम है. इसी क्रम में युवा कवि राकेश रोहित […]