अखिलेश श्रीवास्तव चमन की कहानी ‘सजग-प्रहरी’

अखिलेश श्रीवास्तव चमन   आज की हमारी यह दुनिया बड़ी अजीब है। जिनसे हम मानवता की उम्मीद करते हैं, वही तरह-तरह से मानवता की भावना को आहत करते रहते हैं। यह सब उस धर्म के नाम पर होता है जो मानवीय-मूल्यों की रक्षा के लिए ही अस्तित्व में आया। दुनिया में हर जगह पूँजीवादी सत्ताधारियों […]

अलेसिया मकोव्स्काया का आलेख बेलारूस में मेरी हिन्दी : बचकानी अभिरूचि से लेकर व्यावसायिक कार्य तक

अलेसिया मकोव्स्काया अपनी भाषा में रहते-जीते हुए हमें यह क्षणिक भी एहसास नहीं होता कि इसी भाषा को अगर ऐसा व्यक्ति सीखना चाहे जिसकी मातृभाषा ही नहीं बल्कि संस्कृति और परिवेश भी बिल्कुल अलग हो, तो उसे किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी को जानने के क्रम में मैंने बेला रूस […]

अनिल सिंह अनलहातु की कविताएँ

अनिल सिंह अनलहातु जन्म –  बिहार के भोजपुर(आरा) जिले के बड़का लौहर-फरना गाँव में दिसंबर  1972  शिक्षा –   बी.टेक., खनन अभियंत्रण- इन्डियन स्कूल ऑफ़ माइंस ,धनबाद,                कम्प्यूटर साइंस में डिप्लोमा, प्रबंधन में  सर्टिफिकेट कोर्स. प्रकाशन – साठ – सत्तर कवितायें, वैचारिक लेख, समीक्षाएं एवं आलोचनात्मक लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित. “कविता-इण्डिया”, ”पोएट्री लन्दन” , […]

हरिशंकर परसाई जी की व्यंग्य रचना एक गो-भक्त से भेंट

इस समय गो रक्षा को ले कर पूरे देश में अचानक ही उबाल आ गया है. यह अचानक यूं ही नहीं है बल्कि चुनावों की वजह से है. गो रक्षा के नाम पर अन्य धर्मावलम्बियों को ‘विधर्मी’ घोषित कर मार डालना कहीं से भी उचित नहीं है. बंगाल के महाकवि चंडीदास ने कहा था ‘साबार […]

अदम गोंडवी की गज़लें

अदम गोंडवी का वास्तविक नाम राम नाथ सिंह था. अदम का जन्म गोंडा जिले के परसपुर के  आटा  गाँव में २२ अक्टूबर १९४७ को हुआ. कबीर जैसी तल्खी और जनता के दिलो दिमाग में बस जाने वाली  शायरी अदम की मुख्य धार और उनकी पहचान थी. जन कवि नागार्जुन की तरह ही अदम ने जनता और  उसके राजनीतिक संबंधो को अपना काव्य विषय बनाया और  सच  कहने  से  कभी  नहीं  हिचके.  जनवादी प्रतिबद्धता के साथ वे जिन्दगी  की  अंतिम  सांस तक जुड़े रहे और लेखकीय स्वाभिमान के  साथ  जीते रहे. १९९८ में अदम को  मध्य  प्रदेश  सरकार ने  इन्हें  दुष्यंत कुमार सम्मान से  पुरस्कृत  किया. अदम के प्रमुख एवं चर्चित गजल संग्रह हैं- ‘धरती की सतह पर‘ और ‘समय […]

उमाशंकर सिंह परमार का आलेख “मैं मोम हूँ मुझे छूकर नहीं देखा”

कैलाश गौतम कैलाश गौतम का नाम आते ही उनकी वह बेलौस हँसी याद आती है जो पूरी तरह निश्छल हुआ करती थी। इस मामले में हम खुशनसीब हैं कि हमने गौतम जी की वह हँसी अपने आँखों देखी थी। निराला के शब्दों में कहें तो उनकी ‘वह हँसी बहुत कुछ कहती थी‘। कैलाश गौतम वस्तुतः […]

शैलेंद्र शांत की कविताएँ

शैलेन्द्र जी यह पृथिवी अपने विविधवर्णी रंगों की ही बदौलत ही गुलजार है. यहाँ का जीवन भी अद्भुत रूप से सहकारी है. तकनीकी शब्दावली में इसे जैविक विविधता का नाम दिया जाता है. पशु-पक्षी से लेकर पेड़-पौधे तक सहकार का यह जीवन चलता रहता है. कवि शैलेन्द्र प्रकृति के इस नैकट्य को न केवल महसूस […]

आज़ादी और विवेक के पक्ष में प्रलेस, जलेस, जसम, दलेस और साहित्य-संवाद का साझा बयान

मैंने जब से होश संभाला है यह पहली बार ही है जब इतनी अधिक संख्या में देश के रचनाकारों ने अपना साहित्य अकादमी सम्मान वापस किया है. इन रचनाकारों के इस साहस को हम नमन करते हैं. कुछ लोग इसे ख्याति अर्जित करने का तरीका बता रहे हैं. कुछ इसमें भी राजनीति देख रहे हैं. […]

नीलाम्बुज सिंह की गज़लें

नीलाम्बुज सिंह · मेरा नाम नीलाम्बुज है. बचपन में पहला उपन्यास ही चित्रलेखा पढ़ा और कविता पढ़ी कुकुरमुत्ता . यहीं  से साहित्य के कीटाणु लग गए.  ·  डी. यू. से नजीर अकबराबादी की कविताओं  पर एम फिल कर चुकने के बाद  जे. एन. यू. के भारतीय भाषा केंद्र से ‘सामासिक संस्कृति और आज़ादी के बाद की हिंदी […]

राज्यवर्द्धन की कविताएँ

राज्यवर्द्धन परिचय जन्म– 30.6.1960,जमालपुर(बिहार) प्रकाशित रचनाएं  *धर्मयुग, वामा, नवभारतटाइम्स, हिन्दुस्तान, जनसत्ता, दैनिकजागरण, प्रभातखबर, प्रभातवार्ता, राजस्थान पत्रिका, इंडियाटुडे, आउटलुक, परिकथा, वागर्थ, स्वाधीनता आदि पत्र–पत्रिकाओं में फीचर्स, लेख, अग्रलेख, रिपोतार्ज एवं समीक्षाएं प्रकाशित। *  हंस, वर्तमान साहित्य, वागर्थ, दस्तावेज,वसुधा,कृति ओर, प्रतिश्रुति, अक्षर पर्व, परिकथा, जनपथ, नई धारा, संवेद,  हरिगंधा, समकालीन अभिव्यक्ति, अंतिम जन, जनसत्ता, दैनिक जागरण, प्रभात […]