उमा शंकर सिंह परमार का आलेख “अँधेरे समय में उजली उम्मीदों का कवि”

वीरेन डंगवाल विगत 28 सितम्बर को हम सबके प्यारे कवि वीरेन डंगवाल नहीं रहे। पांच अगस्त 1947 को शुरू हुआ उनके जीवन का सफर 28 सितम्बर को सुबह 4 बजे समाप्त हो गया। वीरेन दा न केवल एक बेहतर कवि थे बल्कि एक उम्दा इंसान भी थे। उनसे मिलने वाला कोई भी व्यक्ति सहज ही […]

शिव प्रकाश त्रिपाठी की कविताएँ

शिव प्रकाश त्रिपाठी जन्म- 27 सितम्बर 1988 स्थान- उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले की बबेरू तहसील में किसान परिवार में शिक्षा- स्नातक एवं परास्नातक इलाहाबाद विश्वविद्यालय शोधकार्य (हिंदी साहित्य), कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल से अनुनाद ब्लॉग एवं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख एवं कविताएँ प्रकाशित  आज की कविता के बारे में प्रायः यह बहस जोरो-शोर से की […]

उमा शंकर चौधरी की कहानी ‘दिल्ली में नींद’

आज हम मानव सभ्यता के जिस तथाकथित शिखर पर खड़े हैं उसमें सचमुच की कितनी जगह मानवता के लिए बची हुई है। ऐसा लगता है जैसे इसमें सामान्य मनुष्य के लिए कोई जगह ही नहीं। आज सब कुछ उनके लिए है जो सामर्थ्यवान है। आम आदमी जैसे घुट-घुट कर मरने के लिए अभिशप्त है। जीना […]

विमलेश त्रिपाठी के उपन्यास “कैनवास पर प्रेम” पर वैभव मणि त्रिपाठी की समीक्षा।

कवि एवं कहानीकार विमलेश त्रिपाठी का भारतीय ज्ञानपीठ से “कैनवास पर प्रेम” नामक उपन्यास प्रकाशित हुआ है। इस उपन्यास की एक बेबाक समीक्षा लिखी है वैभव मणि त्रिपाठी ने। आईए पढ़ते हैं यह समीक्षा।       एक सुन्दर कोलाज सरीखी रचना कैनवास पर प्रेम वैभव मणि त्रिपाठी  एक कुशल नट अपने खेल में हर […]

नरेन्द्र मोहन की आत्मकथा पर योगिता यादव की समीक्षा चुप्पियों की आवाज है ‘कमबख्त निंदर’

नरेन्द्र मोहन किसी भी रचनाकार के लिए आत्मकथा लिखना एक कठिन कार्य होता है। आत्मकथा जो अपनी तो हो लेकिन दूसरों की संवेदनाओं और अनुभूतियों से कहीं न कहीं जुड़े। महज वैयक्तिक हो कर ही न रह जाए। वरिष्ठ कवि, नाटककार और आलोचक के रूप में सुविख्यात डॉ. नरेंद्र मोहन ने इधर अपनी आत्मकथा लिखी है। […]

देवेन्द्र आर्य की कविताएँ

देवेन्द्र आर्य आज का समय जब इतना एकांगी हो चला है कि हम अपने सारे रिश्ते-नाते भूलते जा रहे हैं ऐसे समय में हमारा यह कवि इन रिश्तों की बात एक अलग परिप्रेक्ष्य में करता है। रिश्ते भी ऐसे ही नहीं बन जाते। उनके भी अलग-अलग मौसम होते हैं और यह मौसम ही तय करता […]

सुनील ‍मिश्र की कविताएँ

सुनील मिश्र सिनेमा एवं संस्कृति विषयों पर विगत दो दशकों से सतत आलोचनात्मक लेखन,‍ विश्लेषण। कुछेक नाटक भी विशेषकर ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर गढ़ा मण्डला के बलिदानी राजा शंकर शाह और उनके बेटे रघुनाथ शाह की शहादत पर वीर विप्लवी जिसके अब तक पन्द्रह सराहनीय प्रदर्शन। अभी दो नाटकों एवं एक फिल्म पटकथा पर काम। प्रख्यात […]

अनिल जनविजय द्वारा प्रस्तुत कुछ दुर्लभ फोटोग्राफ्स

फोटो फीचर  अनिल जनविजय अनिल जनविजय ने अपनी फेसबुक वाल पर दुर्लभ फोटोग्राफ्स देने की परम्परा ‘बूझो तो जाने’ की शक्ल में शुरू की थी. अब तो यह काफी लिकप्रिय हो चुकी है. उसी श्रृंखला के कुछ चित्र यहाँ पहली बार के पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं.   मख़दूम मोहिउद्दीन अमरकान्त आग्नेय जी उदय प्रकाश […]

प्रतुल जोशी की कहानी

प्रतुल जोशी किसी भी समाज के चलने के अपने नियम और अपने कायदा-क़ानून हुआ करते हैं। लेकिन जिन्दगी अलबेली होती है। वह तो अपने ही तरीके से ही चलना पसन्द करती है। प्रतुल जोशी ने ज़िंदगी के इस अलबेले तरीके को जानने-समझने की कोशिश की है इस कहानी में। तो आइए पढ़ते हैं प्रतुल जोशी […]

अरूण होता का आलेख ‘समकालीन कविता के आयाम: संदर्भ युवा पीढ़ी की कविता’

समकालीन कविता के स्वर को प्रतिनिधि रूप से समझने की एक कोशिश दिखाई पड़ती है ‘स्वर एकादश’ में। इसमें ग्यारह कवियों की कविताओं को शामिल किया गया है। इसे संपादित किया है कवि राज्यवर्द्धन ने। इस संपादित संग्रह पर पहली बार पर आप पहले भी कुछ समीक्षाएँ पढ़ चुके हैं। इसी कड़ी में एक और […]