रामजी तिवारी की किताब ‘यह कठपुतली कौन नचावे’ पर आशुतोष की समीक्षा

             रामजी तिवारी ने आस्कर अवार्ड्स की एक सख्त पड़ताल की है अपनी किताब ‘यह कठपुतली कौन नचावै’ में. इस किताब की एक समीक्षा लिख भेजी है युवा आलोचक आशुतोष ने. तो आइए पढ़ते हैं यह समीक्षा.              कठपुतली ज़माने के विरूद्ध आशुतोष ‘आस्कर अवार्ड्स’ यह कठपुतली कौन नचावे रामजी तिवारी की पुस्तक बीबीसी हिंदी द्वारा […]

अशोक कुमार पाण्डेय के कविता-संग्रह “प्रलय में लय जितना” पर शाहनाज़ इमरानी की समीक्षा

अशोक कुमार पाण्डेय अशोक कुमार पाण्डेय हमारे समय के एक समर्थ युवा कविहैं। अशोक का हाल ही में एक नया कविता संग्रह आया है ‘प्रलय में लय जितना‘। इस संग्रह पर कवयित्री शहनाज इमरानी ने एक समीक्षा लिखी है। आइए पढ़ते हैं शहनाज की यह समीक्षा।   दिक़्क़त सिर्फ़ इतनी है कि रास्ते में एक वर्तमान […]

रश्मि भारद्वाज की कविताएँ

रश्मि भारद्वाज जन्मस्थान– मुजफ्फरपुर, बिहार शिक्षा –अँग्रेजी साहित्य से एम.फिल पत्रकारिता में डिप्लोमा वर्तमान में पी-एच.डी. शोध (अँग्रेजी साहित्य) दैनिक जागरण, आज आदि प्रमुख समाचार पत्रों में रिपोर्टर और सब-एडिटर के तौर पर कार्य का चार वर्षों का अनुभव, वर्तमान में अध्यापन और स्वतंत्र लेखन। (उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी द्वारा अधीनस्थ विश्वेश्वरया कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर […]

उदय प्रकाश की कहानी मोहन दास पर विजय शर्मा की विवेचना

उदय प्रकाश किसी भी रचनाकार के लिए अपने शिल्प और कथ्य से बाहर निकल कर नए शिल्प और कथ्य में रचने की एक बड़ी चुनौती होती है। जो इसे नहीं कर पाते वे अपनी रचना में खुद को ही दुहराने लगते हैं और कुछ नया नहीं रच पाते। महाप्राण निराला बहुत हद तक अपनी रचनाओं […]

विपिन चौधरी की हरियाणवी कविताएँ

विपिन चौधरी किसी भी रचनाकार के लिए उसकी देशजता सबसे अहम होती है। अपनी रचनाओं के लिए खाद-पानी वह वहीँ से आजीवन जुटाता है। अपनी देशज बोलियों के ऐसे शब्द जिनका अक्स दूसरी बोलियों में प्रायः नदारद होता है, अपनी कविताओं में ला कर न केवल कविताओं की जमीन को पुख्ता करता है, बल्कि देश-दुनिया […]

समीर कुमार पाण्डेय की कविताएँ

समीर कुमार पाण्डेय यह जीवन भी अपने आप में अनूठा है. कह लें तो एक साथ कई द्वन्द भरे हुए होते हैं इस जीवन में. इस रूप में द्वन्द का दूसरा नाम ही जीवन लगता है. व्यक्ति जीने के लिए आजीवन इधर-उधर भागता फिरता है. और भागने-फिरने के बीच ही अपने लिए स्थायित्व की कामना […]

अरूण कमल के कविता कर्म पर अच्युतानन्द मिश्र का आलेख ‘यहाँ रोज कुछ बन रहा है।‘

अरुण कमल अरूण कमल हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि हैं। इनके सम्पूर्ण कविता कर्म पर हाल ही में एक आलेख लिखा है युवा कवि और आलोचक अच्युतानन्द मिश्र ने। तो आइए पढ़ते हैं अच्युतानन्द का आलेख ‘यहाँ रोज कुछ बन रहा है।‘        यहाँ रोज कुछ बन रहा है अच्युतानंद मिश्र आठवें दशक की […]