शम्भु यादव की कविताएँ

   जन्मः 11 मार्च 1965 को जिला महेन्द्रगढ़ (हरियाणा) के गाँव बड़कौदा में शिक्षाः दिल्ली विश्वविद्यालय से हिन्दी में स्नातकोत्तर प्रकाशनः एक कविता-संग्रह ‘एक नया आख्यान’ प्रकाशित। पत्रिकाओं और ब्लॉग्स पर कविताएँ प्रकाशित।  समावर्तन नामक पत्रिका अपने एक महत्वपूर्ण स्तम्भ ‘रेखांकित’ के लिए जानी जाती है। इसके अंतर्गत सम्पादक निरंजन श्रोत्रिय किसी चुनिन्दा नए कवि […]

विनय उपाध्याय की कविताएँ

विनय उपाध्याय रोजी-रोजगार का क्रम कुछ ऐसा होता है जिसमें न चाह कर भी आदमी को अपना घर-परिवार-जमीन-देस छोड़ना पड़ता है. लेकिन अपनी जमीन से बिछड़ने की टीस हमेशा रहती है. कवि विनय उपाध्याय ने इस अहसास को खूबसूरती से अपनी कविता में व्यक्त किया है. तो आज पढ़ते हैं विनय की कविताएँ जिसे हमें […]

श्रीकान्त पाण्डेय का आलेख ‘मरघट में तूं साज रही दिल्ली कैसे श्रृंगार?’

श्रीकान्त पाण्डेय राजनीतिज्ञों के लिए साहित्य और संस्कृति हमेशा एक टेढ़ीखीर होती है।शौकिया तौर पर वे इसे आजमा कर मुसीबत को आमंत्रण दे देते हैं। हमारे प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को बिहार के चुनावों के समय दिनकर की याद आई है।अब साहब को यह याद क्यों आयी है इसे समझना थोडा भी मुश्किल नहीं।भाई, जाति-धर्म का […]

एस आर हरनोट की कहानी ‘बिल्लियां बतियाती हैं’

एस आर हरनोट ‘बिल्लियां बतियाती है‘ हरनोट की एक बहु-चर्चित कहानी है जो वर्ष 1995 में ‘पहल‘ में छपी थी और आज तक चर्चा में बनी हुई है। यह कहानी वर्ष 2001 में छपे उनके बहुचर्चित कहानी संग्रह ‘दारोश तथा अन्य कहानियां‘ में संकलित है। यह संकलन आधार प्रकाशन प्रा0 लि0 से छपा है। इस […]

रामजी तिवारी की कविताएँ और उनके कविता संग्रह पर सोनी पाण्डेय की समीक्षा

रामजी तिवारी रामजी तिवारी का दखल प्रकाशन से हाल ही में पहला कविता संग्रह ‘अंधेरे समय का आदमी’ प्रकाशित हुआ है. इस संग्रह की एक समीक्षा की है युवा कवयित्री सोनी पाण्डेय ने. सोनी द्वारा लिखी गयी यह पहली समीक्षा है. समीक्षा के साथ-साथ इसी संग्रह से रामजी तिवारी की चुनिन्दा कविताएँ आपके लिए प्रस्तुत […]

विनोद तिवारी का आलेख ‘आलोचना का समाज क्या है? कहाँ है?’

अशोक वाजपेयी अशोक वाजपेयी कवि होने के साथ-साथ एक आलोचक भी हैं. युवा आलोचक विनोद तिवारी ने अपने आलेख ‘आलोचना का समाज क्या है? कहाँ है?’ में अशोक जी के आलोचक व्यक्तित्व की पड़ताल करने की कोशिश की है. तो आइए पढ़ते हैं विनोद तिवारी का यह आलेख.     आलोचना का समाज क्या है […]

नवनीत सिंह की कविताएँ

नवनीत सिंह 20 जनवरी 1988 को उत्तर प्रदेश के चन्दौली मे जन्मे नवनीत ने अर्थशास्त्र से परास्नातक की डिग्री प्राप्त की है. इन दिनों कविता के समाजशास्त्र से से जूझने की कोशिश में जुटे हुए हैं. नवनीत को नये लेखको को पढने मे रुचि है. इनकी इनकी कुछ कविताये ‘सिताब दियारा’ ब्लाग व ‘असुविधा’ ब्लाग पर प्रकाशित […]

बाल कृष्ण पाण्डेय की पाँच गज़लें

बालकृष्ण पाण्डेय बाल कृष्ण पाण्डेय की पाँच गज़लें बालकृष्ण पाण्डेय एक सजग-सचेत रचनाकार हैं। शोरोगुल से दूर रह कर बराबर रचनाशील रहते हैं। आलोचनात्मक गद्य के अलावा इन्होंने कुछ कहानियाँ, कविताएँ और गज़लें लिखी हैं। आज हम इनकी ताजातरीन ग़ज़लों से आपको रु–ब–रु करा रहे हैं। तो आइए पढ़ते हैं बाल कृष्ण पाण्डेय की गज़लें। […]

निलय उपाध्याय का यात्रा संस्मरण ‘हरिद्वार : गंगा का सबसे पुराना बाजार है’

कवि निलय उपाध्याय पिछले वर्ष गंगा यात्रा पर थे। गंगोत्री से गंगासागर की यह पूरी यात्रा उन्होंने सायकिल से पूरी की। निलय उपाध्याय ने इस यात्रा को अब शब्दों में ढालना शुरू किया है। अनहद-5 में हरिद्वार के संदर्भ में लिखा गया उनका यह संमरण पाठकों के बीच काफी सराहा जा रहा है। इस संस्मरण […]

अल्पना मिश्र से कल्पना पन्त की एक बातचीत

अल्पना मिश्र युवा आलोचक कल्पना पन्त के साथ अल्पना मिश्र से कल्पना पन्त की एक बातचीत अल्पना मिश्र का उपन्यास ‘अन्हियारे तलछट में चमका’  इन दिनों काफी चर्चा में है। इस उपन्यास पर अल्पना को वर्ष 2014का प्रेमचंद स्मृति कथा सम्मान भी प्रदान किया गया है। इस उपन्यास को भाषा के अलग अनूठे अंदाज और […]