अरविन्द दुबे की कविताएँ

डॉ अरविन्द दुबे कविता का वितान व्यापक होता है। दुनिया की हर वस्तु, विचार या विषय कविता का संदर्भ हो सकता है। तो भला विज्ञान, जिसकी इस दुनिया को बदलने में एक बड़ी भूमिका है, कविता से परे कैसे रह सकता है। मुक्तिबोध की कविताओं में हमें स्पष्ट तौर पर यह वैज्ञानिकता दिखाई पड़ती है। […]

फोटो फीचर : अनिल जनविजय

फोटो फीचर अनिल जनविजय अनिल जनविजय ने अपनी फेसबुक वाल पर इधर रोजाना पहेली के तरीके से कुछ चित्र लगा कर नाम पूछते हैं. इस महत्वपूर्ण सिलसिले में से कुछ चित्र पहली बार के पाठकों के लिए प्रस्तुत है. इस बार फोटो फीचर में कुछ चित्र अन्य मित्रों की फेसबुक वाल से भी साभार लिए […]

प्रतिभा गोटीवाले की कविताएँ

प्रतिभा गोटीवाले कविता क्या है? महज शब्दों से खेल या शब्दों के जरिए अनकहे को कह देने का माध्यम। हर कवि अपने समय अपने लेखन में इस प्रश्न से अनायास ही टकराता है। और कविता के माध्यम से ही इसका जवाब खोजने या देने की कोशिश करता है। मानव मन की सहज अनुभूतियों को शब्दों […]

नीलाम्बुज सिंह की कविताएँ

नीलाम्बुज सिंह बचपन में ही पहला उपन्यास ‘चित्रलेखा’ पढ़ा और कविता पढ़ी ‘कुकुरमुत्ता’. यहीं से साहित्य के कीटाणु लग गए. डी. यू. से नजीर अकबराबादी की कविताओं  पर एम फिल कर चुकने के बाद जे. एन. यू. के भारतीय भाषा केंद्र से ‘सामासिक संस्कृति और आज़ादी के बाद की हिंदी कविता‘ पर पी–एच. डी. कर […]

कवि नरेश सक्सेना पर युवा आलोचक नलिन रंजन सिंह का आलेख ‘सुनो चारुशीला: जैसे कविता को लय मिल गई हो’

  नरेश सक्सेना नरेश सक्सेना हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि हैं। विज्ञान या कह लें कि अभियांत्रिकी से जुड़े होने का प्रभाव उनकी कविता में स्पष्ट परिलक्षित होता है लेकिन यह प्रभाव कोई कृत्रिमता नहीं पैदा करता अपितु प्रकृति के साथ जुडाव को और पुख्ता ही करता है। नरेश सक्सेना के कविता संग्रह ‘सुनो चारुशीला’ […]

विजय मोहन सिंह से अमरेन्द्र कुमार शर्मा की एक ख़ास बातचीत

विजय मोहन सिंह बहुमुखी प्रतिभा वाले विजय मोहन सिंह का अभी हाल ही में गुजरात में निधन हो गया। वे एक कहानीकार के साथ-साथ उपन्यासकार, बेहतर आलोचक, उम्दा सम्पादक और फिल्म संगीत के अच्छे जानकार थे। वे अपनी तरह के अनूठे आलोचक थे जिन्होंने बनी बनायी लीक से इतर अपनी अवधारणाएँ विकसित की और उसे […]

भरत प्रसाद की लम्बी कविता

भरत प्रसाद कट्टरतावाद आज अपने नए रंग-रूप में हमारे सामने है। उसकी चाहतें आज भी अपना वर्चस्व कायम करने की ही हैं। इराक हो या फिर अफगानिस्तान, कोई भी देश या समाज उसकी हवस का शिकार बन सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में न केवल वह देश बर्बाद होता है बल्कि वहाँ का जनजीवन बुरी […]

प्रकाश करात का आलेख ‘एरिक हाॅब्सबौम: दिलचस्प समय का इतिहासकार’।

एरिक हाॅब्सबौम एरिक हाॅब्सबौम एक अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा प्राप्त मार्क्सवादी इतिहासकार थे। उनकी लेखकीय स्थापनाएँ व्यापक स्तर पर पूरी दुनिया में स्वीकार की गयीं। इन स्थापनाओं के पीछे उनकी वे मान्यताएँ थीं जिसे और लोग बीती हुईं बातें कहने लगे थे। इसके पीछे उनके अकाट्य तर्क थे।  हाॅब्सबौम ने मार्क्सवादी पद्धति का उपयोग करके समाज की […]

सपना चमडिया की कविताएँ और सपना की कविताओं पर आशीष मिश्र का आलेख

सपना चमड़िया सपना चमडिया की कविताओं से गुजरना उन्हीं के शब्दों को उधार ले कर कहें तो ‘समाज और राजनीति के बड़े दायरे से हो कर गुजरना है।‘ बेशक ये कविताएँ पढ़ते हुए हम अपने समय के क्रूरतम यथार्थ से रू ब रू होते हैं। यह यथार्थ ‘रहमत खा’ कविता में दिखता है जिसमें सपना […]

राकेश रोहित की कविताएँ

राकेश रोहित जन्म : 19 जून 1971. संपूर्ण शिक्षा कटिहार (बिहार) में. शिक्षा : स्नातकोत्तर (भौतिकी). कहानी, कविता एवं आलोचना में रूचि. पहली कहानी “शहर में कैबरे” ‘हंस‘ पत्रिका में प्रकाशित. “हिंदी कहानी की रचनात्मक चिंताएं” आलोचनात्मक लेख शिनाख्त पुस्तिका एक के रूप में प्रकाशित और चर्चित. राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में विभिन्न रचनाओं […]