राजेन्द्र चन्द्रकान्त राय की पुस्तक ‘स्लीमैन के संस्मरण’ का एक हिस्सा

  विलियम हेनरी स्लीमैन विलियम हेनरी स्लीमैन का नाम भारतीय इतिहास में इसलिए भी आदर से लिया जाता है कि उन्होंने मध्य भारत की क्रूरतम ठगी प्रथा का साहसपूर्वक अन्त कर दिया। कर्नल स्लीमैन के संस्मरणों का उम्दा अनुवाद राजेन्द्र चन्द्रकान्त राय ने किया है जिसे इलाहाबाद के साहित्य भण्डार से ‘स्लीमैन के संस्मरण’ नाम […]

ज्ञान प्रकाश चौबे की कविताएँ

  ज्ञान प्रकाश चौबे परिचय जन्म –  18 जुलाई 1981, चेरूइयाँ, जिला-बलिया, (उत्तर प्रदेश) शिक्षा- एम. ए. (हिन्दी साहित्य), बी. एड. (विशिष्ट शिक्षा), पी-एच. डी. (हिन्दी साहित्य) प्रकाशन- ‘नाटककार भिखारी ठाकुर की सामाजिक दृष्टि’ (आलोचना)। संपादन- शोध पत्रिका ‘संभाष्य’ का चार वर्षों तक संपादन। सम्मान- वागर्थ, कादम्बिनी, कल के लिए, प्रगतिशील आकल्प आदि पत्रिकाओं द्वारा […]

अमनदीप कौर की कविताएँ

अमनदीप कौर यह दुनिया जो आज इतनी खूबदूरत दिख रही है उनमें उन कामगारों का बड़ा हाथ है जो बहुत ही अमानवीय परिस्थियों में किसी तरह अपना गुजारा करते हैं। इनके हाथ दुनिया के वे खूबसूरत हाथ हैं जिन्होंने सब कुछ बेहतर बना रखा है और हमें किंचित भी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता। […]

योगिता यादव की कहानी ‘झीनी झीनी बिनी रे चदरिया’

योगिता यादव युवा लेखिका योगिता यादव को हाल ही में “कलमकार पुरस्‍कार” से सम्‍मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार उनकी नयी कहानी “झीनी-झीनी बिनी रे चदरिया” के लिए दिया गया। कहानी में चादर एक ऐसा बिम्ब है जिसे अपने शिल्प के बल पर योगिता ने अनूठा स्वरुप दे दिया है और उसके हवाले से ही […]

भाविनी त्रिपाठी की लघु-कथा ‘तस्वीर’

साहित्यकार की चौकस निगाहें चारों तरफ रहती हैं। न जाने कौन सी घटना उसे अपने लिखे जाने के लिए बेचैन कर दे। अभी हाल ही में सोलह दिसंबर को पूरी दुनिया तब स्तब्ध रह गयी जब तालिबानी आतंकवादियों ने पेशावर के आर्मी स्कूल पर धावा बोल कर 132 मासूम बच्चों को मार डाला। समूचे विश्व […]

हिमांशु मिश्र की पहली कहानी ‘निर्मोचन’

आज जब ऐसा लगता है कि सारे मानवीय मूल्य क्षरित होते जा रहे हैं ऐसे में मानवीय संवेदनाओं को बारीकी से प्रतिबिम्बित करती हिमांशु मिश्र की यह कहानी ताजे हवा के झोंके की तरह नजर आती हैI हिमांशु की भाषा परिपक्व दिखाई पड़ती हैI इसी के चलते कहानी का शिल्प इतना सुगठित है कि लगता […]

हिमांगी त्रिपाठी की कविताएँ

हिमांगी त्रिपाठी यह विडम्बना ही है कि  लड़कियों के साथ आज  भी परिवार में ही दोयम व्यवहार किया जाता है। फटकार जैसे उनकी नियति हो। आधुनिकता का दम-ख़म भरने वाले लोग भी इस मामले में रुढ़िवादियों जैसे ही दिखाई पड़ते हैं। हिमांगी ने इसे शिद्दत से महसूस कर कविता में ढालने का यत्न किया है। […]

अरुणाकर पाण्डेय का ललित निबन्ध ‘हमारा सौन्दर्य बोध’

अरुणाकर पाण्डेय दो वर्ष हो गए उस वीभत्स घटना को घटे जिसने समूचे भारतीय जनमानस को हिला कर रख दिया था। उस घटना को हम ‘निर्भया काण्ड’ के नाम से जानते हैं। लेकिन अफ़सोस आज भी हम जहाँ के तहाँ खड़े हैं। राजधानी दिल्ली तक में स्त्रियाँ जब सुरक्षित नहीं हैं तो और जगह तो […]

रमाशंकर सिंह की कविताएँ

रमाशंकर सिंह आत्मवृत्त के नाम पर कुछ खास नहीं है सिवाय इसके कि गोण्डा जिले के एक छोटे से गांव में जन्म। अन्न उपजाने वाले पिता के कारण भूखे तो कभी नहीं रहे, लेकिन गरीबी और लाचारी को बहुत गहरे तक महसूस किया है। पहली कविता साकेत कालेज की पत्रिका साकेत ‘सुधा’ में 2002 में […]

रवीन्द्र कुमार दास का आलेख ‘मेघदूत का काव्यानुवाद करते हुए’

कुछ रचनाकार ऐसे होते हैं जो अपनी भाषा में लिख कर भी सार्वजनीन हो जाते हैं। क्योंकि उनका लेखन दुनिया भर के लोगों की संवेदनाओं से सहज ही जुड़ जाता है। हमारी संस्कृत काव्य-परम्परा में कालिदास ऐसे ही कवि हैं जिनके लिखे ग्रन्थ दुनिया भर की तमाम भाषाओं में अनुवादित किये गए और पढ़े गए। […]