अंजू शर्मा की कहानी ‘गली नंबर 2’

अंजू शर्मा अंजू शर्मा ने इधर कविता के साथ-साथ कहानियाँ लिखने में भी अपने हाथ आजमाएँ हैं और कुछ बढियाँ कहानियाँ लिखी हैं। इनकी हालिया लिखी कहानी है ‘गली नम्बर दो’ जिसमें जिंदगी के एकान्त से जूझते हुए आखिर एक दिन भूपी की जिंदगी प्यार के रंग में इस कदर रंग जाती है कि उसे […]

भगवानदास मोरवाल के उपन्यास के विमोचन की एक रपट

भगवान दास मोरवाल हमारे समय के ऐसे लेखक हैं जिन्हें उनके लेखन से अलग से पहचाना जा सकता है। ‘काला पहाड़’ उपन्यास से ख्याति पाने वाले मोरवाल जी का अभी हाल ही में नया उपन्यास छप कर आया है  ‘नरक मसीहा’ नाम से। हाल ही में इस उपन्यास का विमोचन पटना पुस्तक मेले में हुआ। […]

राजीव आनंद का आलेख ‘डॉ. हरिवंश राय बच्चन: भारत के बेमिसाल व सर्वाधिक लोकप्रिय कवि’

  हरिवंश राय बच्चन आज 27 नवंबर प्रख्यात कवि हरिवंश राय बच्चन की 107वीं जयंती है। इस अवसर विशेष पर पहली बार के लिए  एक आलेख लिख भेजा है मित्र राजीव आनन्द ने। तो आइए पढ़ते हैं यह आलेख  डॉ. हरिवंश राय बच्चन: भारत के बेमिसाल व सर्वाधिक लोकप्रिय कवि राजीव आनंद  डॉ.  हरिवंश राय […]

‘विविध संवाद’ के मधुरेश पर केन्द्रित विशेष अंक के लोकार्पण की एक रपट

 बरेली से प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘विविध संवाद’ का सौंवा अंक हाल ही में प्रकाशित हुआ है। यह अंक इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसे वरिष्ठ समालोचक मधुरेश जी पर केंद्रित किया गया है। इसका सम्पादन किया है हमारे मित्र और लेखक रणजीत पांचाले ने। इसी अंक का विगत 16 नवम्बर को विमोचन और लोकार्पण किया […]

निर्मला ठाकुर की कविताएँ

निर्मला जी का जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के महुई नामक गाँव में 1942 ई. में हुआ. इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम ए किया. इसके पश्चात आकाशवाणी इलाहाबाद में कार्यक्रम अधिशाषी के रूप में काम करने लगीं. यहीं से वर्ष 2002 में सहायक केंद्र निदेशक के रूप में सेवा निवृत्त हुईं. वर्ष […]

वन्दना शुक्ला की कहानी ‘माँ’

वन्दना शुक्ला इंसानी रिश्ते भी अजीब होते हैं। वे कब कहाँ किस के साथ जुड़ जाएँ कहा नहीं जा सकता। ‘माँ’ इन रिश्तों की पड़ताल करती एक बेजोड़ कहानी है। एक माँ जो अपने से बिछड़ गए बेटे को खोजने के लिए बावली रहती है और तरह-तरह के जतन करती है। आखिर कार उसे तेरह […]

नीलोत्पल की कविताएँ

नीलोत्पल जीवन के लिए जो जरुरी है वह प्रायः दिखायी नहीं पड़ता. हवा-पानी अपनी अदृश्यता के बावजूद इस अमूल्य-अतुल्य जीवन को बचाने के लिए हर क्षण सन्नद्ध रहते हैं. एक संवेदनशील रचनाकर ही इस अदृश्यता को उभारने का काम बखूबी कर सकता है. वैसे भी हमारा समय त्रासद समय है. इस त्रासद समय में कवि […]

येव्गेनी येव्तुशेंको की कविताएँ

येव्गेनी येव्तुशेंको केदार नाथ सिंह ने अपनी गद्य की किताब ‘कब्रिस्तान में पंचायत’ में येव्गेनी येव्तुशेंको की कविताओं का जिक्र किया है. ये कविताएँ उन्हें अनिल जनविजय ने उपलब्ध करायीं थीं. केदार जी अपने एक आलेख में कहते हैं कि ख्रुश्चेव के बाद के परिवर्तन की आवाज को येव्तुशेंको की कविताओं में स्पष्ट रूप से […]

संजय कुमार शाण्डिल्य की कविताएँ

संजय कुमार शाण्डिल्य समकालीन कवियों में संजय का नाम मेरे लिए बिल्कुल नया है. हालांकि उनकी कविताएँ यह बताती हैं कि वे नए कवि नहीं बल्कि एक परिपक्व कवि हैं. उनकी कविताओं की बनक सामान्य तौर पर आज लिख रखे तमाम कवियों से अलग है. यह बनक एक दो दिन में निर्मित नहीं होता बल्कि […]

दिनेश कर्नाटक की कहानी ‘अब तुम ठीक हो बेटा ?’

दिनेश कर्नाटक आज की शिक्षा व्यवस्था को केंद्र में रख कर लिखी गयी इस कहानी में दिनेश कर्नाटक ने कई मुद्दों को सूत्रों में उठाने और उन पर बात करने की कोशिश की है. दिनेश स्वयं भी एक शिक्षक हैं और खुद इस तरह की समस्याओं से दो-चार होते होंगे। इस कहानी में दिनेश का […]