मधुरेश की आलोचना पुस्तक ‘शिनाख़्त’ पर अमीर चंद वैश्य की समीक्षा

चित्र : आलोचक मधुरेश हिन्दी साहित्य में उपन्यास की आलोचना कुछ गिने चुने आलोचकों द्वारा की गयी है। ऐसे आलोचकों में मधुरेश का नाम अग्रणी है। उपन्यास की आलोचना पर मधुरेश की ‘शिनाख़्त’ नाम से एक किताब आई है। इस किताब की एक पड़ताल की है अमीर चंद वैश्य ने। इस किताब के प्रकाशन (2012) […]

कवि सुधीर सक्सेना पर नित्यानानद गायेन का आलेख ‘कवि सुधीर सक्सेना. प्रेम के कवि, जो ईश्वर तो नहीं’

ईश्वर को आधार बना कर जिन कुछ कवियों ने महत्वपूर्ण कवितायें लिखीं हैं उनमें सुधीर सक्सेना का नाम प्रमुख है. इन कविताओं में वे ईश्वर से जैसे बातें करते हुए उसकी वास्तविकता को हमारे सामने रख देते हैं. उनकी कविताओं में प्रेम भरा पड़ा है. प्रेम जो मानवीय रिश्तों और संबंधों की बुनियाद है कवि […]

वाँन गॉग की पेंटिंग्स पर आशीष मिश्र का आलेख

(चित्र : वान गाग) तारपीन तेल में सूरज को घोला मैंने आशीष मिश्र   वान गाग के अन्य तमाम चित्रों के बजाय मुझे ‘गेहूँ के खेत’ श्रृंखला के चित्र ज़्यादा आकर्षित करते हैं। सम्भव है, इस इस आकर्षण के पीछे एक भारतीय किसान मन काम करता हो। वान ने इस श्रृंखला के अधिकांश चित्र अपने जीवन के […]

अल्पना मिश्र के उपन्यास “अन्हियारे तलछट में चमका” का एक अंश

  चर्चित युवा लेखिका अल्पना मिश्र को उनके प्रकाशित उपन्यास “अन्हियारे तलछट में चमका” के लिए वर्ष 2014 का प्रेमचंद सम्मान देने की घोषणा की गयी है। 2006 से प्रतिवर्ष दिए जा रहे इस सम्मान का यह सातवाँ वर्ष है। इस वर्ष इस सम्मान के निर्णायक मंडल में वरिष्ठ आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी, कथाकार शिवमूर्ति और डॉ […]

अल्पना मिश्र के उपन्यास “अन्हियारे तलछट में चमका” का एक अंश

चर्चित युवा लेखिका अल्पना मिश्र को उनके प्रकाशित उपन्यास “अन्हियारे तलछट में चमका” के लिए वर्ष 2014 का प्रेमचंद सम्मान देने की घोषणा की गयी है। 2006 से प्रतिवर्ष दिए जा रहे इस सम्मान का यह सातवाँ वर्ष है। इस वर्ष इस सम्मान के निर्णायक मंडल में वरिष्ठ आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी, कथाकार शिवमूर्ति और डॉ चन्द्रकला […]

आनन्द कुमार पाण्डेय का आलेख आरंभिक कम्युनिस्ट आन्दोलन (1920-1934) और मुस्लिम समुदाय

इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत के इतिहास में कम्युनिस्ट आन्दोलन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.  किसानों और मजदूरों जैसे शोषितों के पक्ष में आवाज उठाने और भूमि सुधारों की मांग करने के कारण कम्युनिस्ट आन्दोलन जनता में काफी लोकप्रिय भी हुए. हमारे युवा साथी आनन्द कुमार पाण्डेय ने भारत के ‘आरंभिक कम्युनिस्ट आन्दोलन […]

आनन्द कुमार पाण्डेय का आलेख आरंभिक कम्युनिस्ट आन्दोलन (1920-1934) और मुस्लिम समुदाय

इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत के इतिहास में कम्युनिस्ट आन्दोलन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.  किसानों और मजदूरों जैसे शोषितों के पक्ष में आवाज उठाने और भूमि सुधारों की मांग करने के कारण कम्युनिस्ट आन्दोलन जनता में काफी लोकप्रिय भी हुए. हमारे युवा साथी आनन्द कुमार पाण्डेय ने भारत के ‘आरंभिक कम्युनिस्ट आन्दोलन […]

आनन्द पाण्डेय का आलेख आरंभिक कम्युनिस्ट आन्दोलन (1920-1934) और मुस्लिम समुदाय

इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत के इतिहास में कम्युनिस्ट आन्दोलन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.  किसानों और मजदूरों जैसे शोषितों के पक्ष में आवाज उठाने और भूमि सुधारों की मांग करने के कारण कम्युनिस्ट आन्दोलन जनता में काफी लोकप्रिय भी हुए. हमारे युवा साथी आनन्द पाण्डेय ने भारत के ‘आरंभिक कम्युनिस्ट आन्दोलन और […]

श्रद्धांजलि आलेख ‘यू आर अनन्तमूर्ति : लेखक के साथ-साथ एक सक्रिय एक्टिविस्ट भी’

यू आर अनन्तमूर्ति : लेखक के साथ-साथ एक सक्रिय एक्टिविस्ट भी ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता कर्नाटक के मशहूर लेखक यू आर अनंतमूर्ति नहीं रहे। शुक्रवार को बेंगलूरू के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 81 वर्ष के थे। राजधानी के मणिपाल अस्तपताल मे भर्ती अनंतमूर्ति के सभी अंगों ने काम करना बंद कर दिया […]

प्रतुल जोशी का आलेख ‘यादें लूकरगंज की’

  इलाहाबाद अपने साहित्यिक परिवेश के लिए ख्यात रहा है। इसके तमाम मुहल्लों में एक से बढ़ कर एक नामचीन हस्तियाँ आसानी से देखने को मिल जाती थीं। हम खुद रामस्वरुप चतुर्वेदी, लक्ष्मीकान्त वर्मा, केशव चन्द्र वर्मा, रघुवंश, मार्कंडेय, अमरकान्त, शेखर जोशी, सत्यप्रकाश मिश्र, राम कमल राय जैसी नामचीन शख्सियतों से आसानी से मिलते और […]