संतोष चतुर्वेदी के संग्रह ‘दक्खिन का भी अपना पूरब होता है’ पर आचार्य उमाशंकर सिंह परमार की समीक्षा

आज उमाशंकर सिंह परमार का जन्मदिन है। आज के दिन उन्होंने पहली बार पर लगाने के लिए एक समीक्षा भेजी जो मेरे ही नवीनतम संग्रह पर है। शुरूआती एक-दो पोस्टों के बाद आम तौर पर अपने ही ब्लॉग पर मैं अपनी कविताएँ और समीक्षा देने से बचता रहा हूँ. लेकिन आज उमाशंकर के आग्रह को […]

कुमार कृष्‍ण शर्मा की कवितायें

सन 2008 से ‌हिंदी में कविताएं लिखना शुरू किया। मौजूदा समय में हिंदी दैनिक अमर उजाला जम्मू के साथ वरिष्‍ठ पत्रकार के तौर पर काम कर रहे। भारत रत्न बिस्मिल्लाह खान, पा‌किस्तानी गजल गायिका फरीदा खानम, संतूर वादक पंडित शिव कुमार शर्मा,  नामवर सिंह, ज्ञानपीठ पुरस्कृत प्रो. रहमान राही आदि का ‌साक्षात्कार कर चुके। ‘पहली […]

विमलेश त्रिपाठी के कविता संग्रह ‘एक देश और मरे हुए लोग’ पर मिथलेश शरण चौबे की समीक्षा

सुपरिचित युवा कवि-कहानीकार विमलेश त्रिपाठी का बोधि प्रकाशन से हाल ही में एक नया कविता संग्रह आया है- ‘एक देश और मरे हुए लोग’. इस संग्रह पर एक समीक्षा लिख भेजी है युवा कवि मिथलेश शरण चौबे ने, तो आईए पढ़ते हैं यह समीक्षा – ‘सबसे कम आदमी रह जाने की होड़ के विरुद्ध’ सबसे […]

श्रीराम त्रिपाठी का श्रद्धांजलि लेख ‘वह ज्योति अचानक सदा को खो गयी’

समय कितनी तेजी से बीत जाता है, इसका हम अंदाजा नहीं लगा सकते। पिछले इक्कीस जून को  मनहूश  खबर मिली थी कि प्रख्यात आलोचक शिव कुमार मिश्र नहीं रहे। हमारे लिए यह खबर बज्रपात की तरह थी। इस दुखद घटना को अब एक वर्ष होने जा रहे हैं। इस अवसर पर शिव कुमार जी को […]

पूनम शुक्ला के कविता संग्रह “सूरज के बीज” के की चन्द्र भार्गव द्वारा की गयी समीक्षा

 युवा कवियित्री पूनम शुक्ला के नए कविता संग्रह “सूरज के बीज” पर एक समीक्षा लिखी है चन्द्र भार्गव ने. आईए पढ़ते हैं यह समीक्षा    संवेदनात्मकता के उजास में उपजे “सूरज के बीज” चन्द्र भार्गव  पूनम शुक्ला के काव्य ‘सूरज के बीज‘  का प्रभामंडल संवेदना, करुणा, दया, उल्लास, आशा, निराशा सभी पहलुओं से ओत-प्रोत है। […]

अच्युतानंद मिश्र का आलेख ‘ऐ काश जानता न तेरी रहगुजर को मैं’

लांग नाईन्टीज को ले कर हमने पहले भी इस ब्लॉग पर एक बहस चलायी थी जिसके अन्तर्गत विजेन्द्र जी, आग्नेय जी, अमीर चंद वैश्य, अशोक तिवारी और महेश चन्द्र पुनेठा के आलेख प्रकाशित हुए थे। इस बहस को ‘पहल’ ने भी आगे बढाया जिसमें मृत्युंजय, विवेक निराला और अच्युतानन्द मिश्र के लेख प्रकाशित हुए हैं। […]

हाईवे फिल्म की श्रीकान्त दुबे द्वारा की गयी समीक्षा

हाल में ही रिलीज हुई फिल्म ‘हाईवे’ अपने नए कथ्य और प्रयोग के चलते और हिंदी फिल्मों से अलग दिखाई पड़ी है और चर्चा के केन्द्र में रही है. इस फिल्म की तह में जाने का एक प्रयास किया है युवा कवि-कहानीकार श्रीकान्त दुबे ने. तो आईए श्रीकान्त के इस आलेख के साथ-साथ हम भी […]

अविनाश मिश्र की कविताएँ

युवा कवियों में जिन कुछ कवियों ने अपने शिल्प और अनूठे बिम्ब के बल पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है, उसमें अविनाश मिश्र का नाम प्रमुख है. इसी क्रम में वे उन क्षेत्रों की तरफ भी जाते हैं जो प्रायः वर्जित समझे जाते हैं. ‘वर्जित जीवन के उत्तेजक साक्ष्य’ जैसी लम्बी कविता (जो कई […]