सुशील कुमार की कविताएँ

भाषा शब्द बन कर कवि के पास कैसे आती है इसे जानने के लिए आपको कवि के घर जाना पड़ेगा जो अपने घर में रहते हुए भी प्रकृति से जुड़ा होता है. हो सकता है आपको वहाँ भौतिक सुविधाओं का अभाव दिखे, लेकिन आत्मीयता की सुगन्ध और समृद्धि आपको वहाँ जरुर दिखाई पड़ेगी.  ऐसी ही […]

वन्दना शुक्ला का यात्रा वृत्तांत

लेखक जब भी कहीं किसी जगह की यात्रा करता है तो औरों से इतर वह वहाँ की आबोहवा, परिस्थितियों, जलवायु, ऐतिहासिक इमारतों, दस्तावेजों, उस जगह की ऐतिहासिकता आदि को अपने लेखन का हिस्सा बनाता है। स्वयं द्रष्टा होते हुए भी उससे अलग हो कर उसे देखने का प्रयास करता है और उसे लिपिबद्ध करने की […]

रणविजय सिंह सत्यकेतु की सात कविताएं

सत्यकेतु का नाम हिंदी के युवा कथाकारों में सुपरिचित नाम है। हाल ही में पता चला कि सत्यकेतु ने कुछ बेहतरीन कवितायें भी लिखीं हैं। मैंने सत्यकेतु से कविताओं के लिए आग्रह किया। इन कविताओं के जरिये पता चलता है कि इस कहानीकार के मानस में एक कवि पैठा हुआ है जो इसकी कहानियों को […]

विजेंद्र जी से अशोक तिवारी की बातचीत

विजेंद्र जी का व्यक्तित्व बहुआयामी है. मूलतः एक कवि होने के साथ-साथ वे एक बेहतर इंसान हैं, बढ़िया पेंटिंग्स बनाते हैं, गद्य में भी उनका कोई सानी नहीं। ‘कृति ओर’ जैसी पत्रिका के संस्थापक सम्पादक हैं. विजेंद्र जी से नोएडा में उनके घर पर अशोक तिवारी ने हाल ही में एक बातचीत की है जिसमें […]

श्रीराम त्रिपाठी का आलेख ‘आलोचना : इस समय’

साहित्य में आमतौर पर आलोचना को रचना के पीछे-पीछे चलने वाली विधा माना जाता है। लेकिन वरिष्ठ आलोचक श्रीराम त्रिपाठी आलोचना को भी रचना कर्म मानते हैं। इसी क्रम में वे कहते हैं – ‘आलोचना और सर्जना को लाख विरोधों के बावजूद एक-दूसरे से संयोजित होना ही पड़ेगा। अन्यथा दोनों का बचना मुमकिन नहीं।’ आलोचक […]

चन्द्रेश्वर का आलेख ‘आज की हिंदी कविता और तथाकथित मुख्यधारा का सवाल’

आज की हिन्दी कविता को लेकर तमाम तरह की नकारात्मक बातें की जा रहीं हैं। बहुत लोग तो बिना कुछ पढ़े-लिखे  ही इस  बात का  सियापा करने लगे  हैं  अब  कविता  बची  ही नहीं या  लिखी  ही नहीं जा रही। चंद्रेश्वर युवा कवि-आलोचक हैं और उन्होंने आज की हिन्दी कविता पर एक सतर्क निगाह डाल […]

हरीश चंद्र पाण्डे के कहानी संग्रह ‘दस चक्र राजा’ पर रमेश प्रजापति की समीक्षा

हरीश चन्द्र पाण्डे की ख्याति आम तौर पर एक कवि की है। इसमें कोई संशय भी नहीं कि हरीश जी हमारे समय के बेहतरीन कवियों में से एक हैं। लेकिन अभी-अभी राजकमल प्रकाशन से हरीश जी का एक कहानी संग्रह आया है ‘दस चक्र राजा।’ ऐसा लगता है कि कवि जो बातें अपनी कविताओं में […]

जितेन्द्र श्रीवास्तव के कविता संग्रह ‘कायान्तरण’ पर मनीषा जैन की समीक्षा

जितेन्द्र श्रीवास्तव युवा कविता में एक सुपरिचित नाम है. अभी-अभी उनका एक और कविता संग्रह ‘कायान्तरण’ आया है. इस संग्रह की समीक्षा कर रही हैं युवा कवियित्री मनीषा जैन. तो आईए पढ़ते हैं यह समीक्षा   कायान्तरण से आगे आत्मान्तरण की कविताएं मनीषा जैन कविता का स्वभाव जहां सरल, कोमल व शांत होता है वहीं वह […]

शैलजा की डायरी

शैलजा को मैंने उनकी कविताओं के जरिये जाना. तभी शैलजा में एक बेहतर रचनाकार की एक संभावना दिखी थी. इधर फेसबुक पर उनकी डायरी के पन्ने मैं लगातार देखता रहा हूँ. जैसे इन पन्नों में भी एक नयी कविता रच रही हों वे. इन पन्नों में अतीत नास्टेल्जिक हो कर नहीं बल्कि रचनात्मक और सकारात्मक […]

मुकेश मानस की कहानी ‘चींजे जब लौटती हैं’

किसी भी कहानीकार के लिए मिथक एक चुनौती की तरह होते हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी चलते आ रहे इन मिथकों से आज के सन्दर्भ को जोड़ते हुए कोई कृति लिखना आसान काम नहीं। मुकेश मानस ने अपनी  कहानी  ‘चीजें जब लौटती हैं’ में हमारे प्राचीन मिथक को आधुनिक सन्दर्भों से भलीभांति जोड़  कर  यह  साबित  […]