महेश चन्द्र पुनेठा के संग्रह ‘भय अतल में’ पर विजय गौड़ की समीक्षा

महेश चन्द्र पुनेठा का पहला कविता संग्रह ‘भय अतल में’ काफी चर्चित रहा था. इस संग्रह की कविताओं की ख़ास बात यह थी कि महेश ने अत्यंत सामान्य लगने वाली घटनाओं और व्यक्तित्वों को अपनी कविता का विषय बनाया। पहाड़ के साथ-साथ उनका एक शिक्षक और आम आदमी का वह संवेदनशील सा मन भी इन […]

भाविनी त्रिपाठी की लघु कहानी विडम्बना

बालपन से ही लड़कियों को यह एहसास हो जाता है कि वे इस दुनिया में बिल्कुल अलग हैं। समाज जैसे नचाये उन्हें नाचना है। उन्हें कोई सवाल नहीं करना है बल्कि सवालों के जवाब देना है। भाविनी अभी बी टेक की छात्रा हैं लेकिन इनकी रचनात्मक निगाह ने बड़ी सूक्ष्मता से स्त्री जीवन की विडम्बना […]

रतीनाथ योगेश्वर के कविता संग्रह ‘थैंक्यू मरजीना’ पर उमाशंकर परमार की समीक्षा

किसी भी कवि का पहला कविता संग्रह उसके लिए महत्वपूर्ण होता है। रतीनाथ योगेश्वर ऐसे कवि हैं जो दो दशकों से लिख रहे हैं लेकिन पहला संग्रह ‘थैंक्यूमरजीना’ अभी-अभी इलाहाबाद के साहित्य भण्डार से प्रकाशित हुआ है। साहित्य भण्डार ने एक अनूठी पहल के अंतर्गत इस वर्ष पचास किताबें पचास रूपये मूल्य पर प्रकाशित की […]

अमरकान्त जी पर प्रतुल जोशी का संस्मरण

विगत 17 फरवरी को प्रख्यात कथाकार और हम सब के दादा अमरकान्त जी नहीं रहे. यह हम  सब के लिए एक गहरी क्षति थी. प्रतुल जोशी ने अपने संस्मरण में अमरकान्त जी के साथ बिठाये गए पलों को ताजा किया है. आईए पढ़ते हैं प्रतुल जोशी का यह संस्मरण  हमारे ताऊ जी “अमरकांत जी”: स्मृति […]

मार्कण्डेय जी की कहानियों में बाल-मनोविज्ञान पर हिमांगी त्रिपाठी का आलेख

मार्कण्डेय जी की पुण्यतिथि 18 मार्च के अवसर पर विशेष प्रस्तुति के क्रम में हमने वरिष्ठ आलोचक अमीर चंद वैश्य का समीक्षा-आलेख प्रस्तुत किया था. इसी प्रस्तुति के दूसरे क्रम में पेश है हिमांगी त्रिपाठी का आलेख ‘मार्कण्डेय जी की कहानियों में बाल-मनोविज्ञान एवं समय सन्दर्भ’ मार्कण्डेय की कहानियों में बाल-मनोविज्ञान एवं समय सन्दर्भ   […]

मार्कण्डेय जी के कविता संग्रह ‘यह पृथ्वी तुम्हें देता हूँ’ की समीक्षा

मार्कण्डेय न केवल एक कहानीकार थे बल्कि एक सक्षम कवि भी थे. अभी पिछले ही वर्ष मार्कण्डेय जी का एक कविता संकलन ‘यह पृथ्वी तुम्हें देता हूँ’ आया है. इस संग्रह पर एक समीक्षा लिखी है वरिष्ठ आलोचक अमीर चंद वैश्य ने. मार्कण्डेय जी की पुण्यतिथि (18 मार्च) के अवसर पर हम यह विशेष प्रस्तुति […]

संतोष भदौरिया, नरेंद्र पुंडरीक के संपादन में छपी किताब ‘केदारनाथ अग्रवाल : कविता का लोक आलोक’ की समीक्षा

केदार को समझने के प्रयास के क्रम में अभी हाल ही में एक पुस्तक आयी है – ‘केदारनाथ अग्रवाल: कविता का लोक आलोक’। संतोष भदौरिया एवं नरेंद्र पुण्डरीक के संपादन में केदार की जन्मशती पर प्रकाशित यह पुस्तक केदार व प्रगतिशील कविता को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने व परखने का एक महत्वपूर्ण  प्रयास है। इस […]

हरबंस मुखिया की कविताएँ

हरबंस मुखिया मध्यकालीन इतिहास के जाने-माने विद्वान् हैं। हरबंस जी की कुछ कविताएँ आप पहले ही ‘पहली बार’ पर पढ़ चुके हैं। इन कविताओं को पाठकों का असीम प्यार मिला। मैंने फिर हरबंस जी से कविताओं की गुज़ारिश की। हाल ही में ये कवितायें मुझे प्राप्त हुईं। एक लम्बे अर्से के बाद पेश है पहली […]

विजेन्द्र जी की किताब ‘सौंदर्यशास्त्र : भारतीय चित्त और कविता’ पर सुशील कुमार की समीक्षा

·           किसी भी कवि को गद्य जरुर लिखना चाहिए. उसकी पहचान उसके गद्य से की जा सकती है. कवि का गद्य अन्ततः उसके कवि-कर्म को ही और निखारता है. विजेन्द्र जी हमारे समय के ऐसे महत्वपूर्ण कवि हैं जिन्होंने प्रचुर मात्रा में गद्य लेखन के साथ-साथ अद्भुत पेंटिंग्स भी बनाये हैं. कविता में सौन्दर्य […]

सीमस हीनी की कविताएँ : अनुवाद सरिता शर्मा

सीमस हीनी (Seamus Heaney) (जन्‍म : 13 अप्रैल 1939; मृत्‍यु 30 अगस्त 2013) बीसवी शताब्‍दी के सबसे मशहूर कवियों में सीमस हीनी का नाम गिना जाता है. वे मशहूर आयरिश कवि, अनुवादक, नाटककार एवं प्रवक्‍ता थे. उनका चौदह काव्‍य संग्रह, चार गद्य संग्रह एवं दो नाटक प्रकाशित हुए हैं. अपने पहले कविता संग्रह ‘डेथ ऑफ़ ए […]