वन्दना शुक्ला के उपन्यास ‘मगहर की सुबह’ का एक अंश

वन्दना शुक्ला ने थोड़े ही समय में कहानीकार के रूप में अपनी पहचान बना ली है। जीवन की उष्मा से भरी हुई उनकी कहानियाँ सहज ही हमारा ध्यान आकृष्ट करती रही हैं। आधार प्रकाशन से वन्दना का पहला उपन्यास ‘मगहर की सुबह’ आने वाला है। इस उपन्यास में भी ग्रामीण और कस्बाई जीवन के रंग […]

‘कृति ओर’ (65-66) के ‘पूर्वकथन’ पर आशीष कुमार सिंह की टिप्पणी

विजेन्द्र जी का व्यक्तित्व बहुआयामी है। वे ‘कृति ओर’ पत्रिका में अपने पूर्वकथन के लिए भी जाने जाते हैं। इसमें वे अपने बेबाक विचार तत्कालीन समाज राजनीति और साहित्य के मद्देनजर रखते हैं। ‘कृति ओर’ का अधिकांश पाठक वर्ग इसकी प्रतीक्षा ‘पूर्व कथन’ के लिए करता है। इसी ‘पूर्व कथन’ पर हमारे युवा साथी आशीष […]

शाहनाज़ इमरानी की कविताएँ

शहनाज इमरानी कविता की  दुनिया में एक नया नाम है. शहनाज की कवितायें बिम्ब और शिल्प के चौखटे तोड़ते हुए ढेर सारी उम्मीदों के साथ हमारे सामने हैं. देखने वालों को इन कविताओं में एक अनगढ़पन भी दिखेगा लेकिन इस बात से इंकार नहीं कि यह नयी कवियित्री पूरी तरह चौकस है अपने समय, समाज […]

सामयिक प्रकाशन से अभी प्रकाशित हो रहे कैलाश बनवासी के उपन्यास ‘लौटना नहीं है’ का एक अंश

कैलाश बनवासी अपनी कहानियों के लिए हिन्दी में पहले से ही ख्यात रहे हैं. अभी हाल ही में कैलाश ने अपना एक महत्वपूर्ण उपन्यास पूरा किया है.  ध्यातव्य है कि कैलाश बनवासी का यह पहला उपन्यास है. ‘लौटना नहीं है’  नामक यह उपन्यास सामयिक प्रकाशन से छप कर आने ही वाला है. प्रस्तुत है इसी […]

आत्मा रंजन के कविता संग्रह ‘पगडंडियां गवाह हैं’ पर अमीर चन्द्र वैश्य की समीक्षा

  आत्मा रंजन का पहला ही कविता संग्रह ‘पगडंडियां गवाह हैं’ अपनी विविधवर्णी कविताओं की वजह से सशक्त एवं महत्वपूर्ण बन पड़ा है। जनपदीय सुगन्ध के साथ-साथ इन कविताओं में उन लोगों के श्रम का ताप भी स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है जिनके बिना इस दुनिया की कल्पना ही नहीं की जा सकती। […]

सुनील श्रीवास्तव की कहानी ‘डॉग बाइट’

सुनील श्रीवास्तव की पहली कहानी है ‘डाग बाईट।’ पहली कहानी होने के बावजूद यह अपने शिल्प और गठन में पर्याप्त चुस्त-दुरुस्त है. नौकरशाही का यह तन्त्र हर स्तर पर कितना भ्रष्ट हो चुका है इसकी एक बानगी यहाँ सहज ही दिखायी पड़ती है. इस व्यवस्था में काम करने वाले कुछ ईमानदार लोग किस तरह की […]

राकेश रंजन की दस कविताएँ

राकेश रंजन जन्म: 10 दिसंबर, 1973 शिक्षा: काशी हिंदू विश्वविद्यालय से सर्वोच्च अंकों के साथ स्नातकोत्तर (हिंदी)। वृत्ति: अध्यापन। प्रकाशन: कविताएँ हिंदी की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित एवं ‘अँधेरे में ध्वनियों के बुलबुले’ (सारांश प्रकाशन, दिल्ली), ‘संधि-वेला’ (वाणी प्रकाशन, दिल्ली) तथा ‘जनपद: विशिष्ट कवि’ (प्रकाशन संस्थान, दिल्ली) में संकलित। दो कविता-संग्रह ‘अभी-अभी जनमा है कवि’ […]

मनीषा जैन की कविताएँ

नाम- मनीषा जैनजन्म- 24 सितम्बर, 1963 मेरठ उ.प्र.शिक्षा- बी. ए दिल्ली विश्वविद्यालय,    एम. ए. हिन्दी साहित्यप्रकाशित रचनाएं- एक काव्य संग्रह प्रकाशित ‘‘रोज गूंथती हूं पहाड़’’।            नया पथ, कृति ओर, अलाव, वर्तमान साहित्य, मुक्तिबोध, बयान, साहित्य भारती, जनसत्ता, रचनाक्रम, जनसंदेश, नई दुनिया, अभिनव इमरोज,युद्धरत आम आदमी आदि पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं, आलेख, समीक्षायें प्रकाशित हताशाओं […]

विजेन्द्र की कविता ‘ओ एशिया’ पर अमीर चन्द वैश्य का आलेख

यह विडम्बना ही है कि दुनिया का सबसे बड़ा महाद्वीप होने के बावजूद एशिया एक लम्बे समय से साम्राज्यवादी शक्तियों के उत्पीड़न का शिकार रहा है। पहले यूरोपीय शक्तियों ने एशिया के देशों को गुलाम बना कर शोषण किया और अब अमरीका अपने निहित स्वार्थों के चलते एशिया के ही विभिन्न हिस्सों कभी ईराक, कभी […]

विजेन्द्र जी के संग्रह ‘आँच में तपा कुंदन’ पर जीतेन्द्र जी की समीक्षा

वरिष्ठ कवि विजेन्द्र जी दस जनवरी को अपनी उम्र का अट्ठाहत्तरवाँ पड़ाव पूरा कर रहे हैं। इस उम्र में भी जिस प्रतिबद्ध ढंग से वे लेखन कार्य में जुटे हैं वह हमें अचंभित करता है। उनका अध्ययन क्षेत्र व्यापक है। विश्व साहित्य पर उनकी पकड़ तो है ही वे बिल्कुल नए से नए रचनाकारों की […]