शिवानन्द मिश्र की नववर्ष पर कविताएँ

  शिवानन्द मिश्र युवा कवि हैं। आज जब उनसे मेरा मिलना हुआ तो उन्होंने नव वर्ष पर लिखी गयी अपनी कुछ पंक्तियाँ सुनाई जिसके लिखने की शुरुआत उन्होंने वर्ष २००४ से किया था। तब से वे अनवरत नव वर्ष पर कुछ न कुछ लिखते रहे हैं। वर्ष २०१३ में शिवानन्द ने दो कविताएँ लिखी थीं। […]

आंचलिक लोकगीत: एक विश्लेषण

अगर किसी भी जगह की खुशबू महसूस करनी हो तो वहाँ के लोकगीतों को जानने की कोशिश करिए। इसमें आपको एक साथ वहाँ की तमाम खुशबू मिल जायेगी। आज के समय में टेलीविजन, वीडियो और मोबाईल संस्कृति ने हमारे लोकगीतों को काफी क्षति पहुँचायी है। ऐसे में लोकगीतों को सुरक्षित-संरक्षित करने के यत्न जोर-शोर से […]

पूनम शुक्ला

नाम – पूनम शुक्लाजन्म – 26 जून 1972, बलिया , उत्तर प्रदेश शिक्षा – बी ० एस ० सी० आनर्स ( जीव विज्ञान ), एम ० एस ० सी ० – कम्प्यूटर साइन्स ,एम० सी ० ए०। चार वर्षों तक विभिन्न विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षा प्रदान की ,अब कविता,गीत ,ग़ज़ल,लेख ,संस्मरण,लघुकथा लेखन मे संलग्न।कविता संग्रह […]

निर्मला तोंदी की कविताएं

हमारे इर्द गिर्द तमाम घटनाएँ घटती रहती हैं. कुछ बाहर तो कुछ हमारे अन्दर. लेकिन इनको महसूस कर सकता है या तो एक संवेदनशील मन या फिर प्रकृति. इसके अन्तर्गत वे पेड़ पौधे भी आते हैं जो दुनिया भर का कष्ट सहन कर इस पृथ्वी और इस जीवन को बचाने का कार्य चुपचाप कर रहे […]

संगीत संसार : सुनें, गुनें और अपनी दुनिया बुनें

नवोदित सक्तावत  नवोदित सक्तावत का जन्म 4 अप्रैल 1983 को झाबुआ जिले में हुआ लेकिन इनकी परवरिश उज्जैन में हुई। सक्तावत पेशे से पत्रकार हैं। लेखन के क्षेत्र में ये एक दशक से सक्रिय हैं। वर्तमान में दैनिक भास्कर हिंदी समाचार पत्र में संपादकीय प्रभाग में सीनियर सब एडीटर के पद पर कार्यरत। सिनेमा, संगीत, […]

जितेन्द्र कुमार के काव्य-संग्रह ‘समय का चन्द्रमा’ के बारे में

जितेन्द्र कुमार का काव्य-संग्रह ‘समय का चन्द्रमा’ वर्ष 2009 में ही प्रकाशित हुआ था। लेकिन इस  महत्वपूर्ण संग्रह पर कोई बातचीत नहीं हो पायी थी।इस संग्रह  पर एक समीक्षा लिखी है हमारे कवि-आलोचक मित्र बलभद्र ने। तो आईए पढ़ते हैं यह समीक्षा।   बलभद्र     जितेन्द्र कुमार का काव्य-संग्रह ‘समय का चन्द्रमा’ वर्ष 2009 में ही प्रकाशित […]

यह कविता का नहीं कवियों का समय है

आजकल एक महत्त्वपूर्ण बात पर लगातार बात होती है कि कविता लगातार पाठकों से दूर क्यों होती जा रही है। क्या यह आज की कविता इस नाते पाठकों का वह सम्मान हासिल नहीं कर पा रही कि वह अपने को आज के समय से नहीं जोड़ पा रही। कई एक ऐसे ही महत्वपूर्ण सवालों पर […]

चैतन्य नागर की कविताएँ

  चैतन्य की कवितायें हमारे अंदर वह बेचैनी पैदा करतीं हैं जो अब आम तौर पर समाप्त होती जा रही है। बढ़ते भौतिकतावाद के साथ हमारी संवेदनशीलता लगातार क्षरित होती जा रही है। पहले हम समझ जाते थे बकौल कवि  ‘क्यों, किसके लिए रो रही है /किस बीते कल के लिए /किस दुखती रग को’ […]

मिलजुल मन : किरदारों का आत्मीय अंतरंग

 (चित्र में मृदुला गर्ग और अचला बंसल के साथ राकेश बिहारी) तमाम किन्तु-परन्तु के बावजूद पुरस्कारों के क्षेत्र में साहित्य अकादमी पुरस्कारों की अपनी अलग महत्ता है. हर किसी को यह जानने की उत्सुकता रहती है कि इस वर्ष का पुरस्कार किसे दिया जा रहा है.’मिलजुल मन’ उपन्यास पर मृदुला गर्ग को इस वर्ष का […]

युवा कवि केशव तिवारी से महेश चन्द्र पुनेठा की बातचीत

लोक और जनपदीय कविता के प्रमुख हस्ताक्षर केशव तिवारी से अभी हाल ही के दिनों में एक बातचीत की युवा कवि महेश चन्द्र पुनेठा ने। इस बातचीत के प्रसंग में कई महत्वपूर्ण बातें उभर कर सामने आयीं हैं। इन्हें जानने के लिए आइये पढ़ते हैं यह बातचीत। युवा कवि केशव तिवारी मेरे उन गिने-चुने मित्रों […]