अमीर चन्द वैश्य

पहली बार पर वरिष्ठ आलोचक अमीर चन्द्र वैश्य हर महीने एक कृति की समीक्षा प्रस्तुत कर रहे हैं। इसी क्रम में इस बार प्रस्तुत है आलोचक भरत प्रसाद की आलोचना पुस्तक ‘सृजन की इक्कीसवीं सदी।’  वैश्वानरी चिन्तन एवं चिन्ताएँ     मेरे सामने एक महत्वपूर्ण पुस्तक है ‘सृजन की 21 वीं सदी’.  लेखक हैं उदीयमान कवि-कहानीकार […]

भालचन्द्र जोशी

भालचंद्र जोशी हमारे समय के सुपरिचित कहानीकार हैं। भाल चन्द्र जी ने अपनी कहानियों में उन साहसिक विषयों को उठाने का जोखिम मोल लिया है जिससे आमतौर पर कहानीकार बचते रहे हैं। ‘चरसा’ इनकी ऐसी ही एक कहानी है जिसमें अछूत  जाति के युवक किशन ने अपने ही गाँव की ब्राहमण युवती सविता से प्रेम […]

युवा कविता पर वरिष्ठ आलोचक डॉ0 जीवन सिंह से बातचीत

(फोटो: जीवन सिंह) आरा से निकलने वाली पत्रिका ‘जनपथ’ का अभी-अभी कविता विशेषांक आया है। इस विशेषांक में युवा कवि महेश चन्द्र पुनेठा ने वरिष्ठ आलोचक जीवन सिंह का एक साक्षात्कार लिया है। इस साक्षात्कार को हम ज्यों का त्यों आप सब के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं।   1-महेश चंद्र पुनेठाः हिंदी युवा कविता के […]

मोहन कुमार नागर

जन्म – १ अगस्त १९७२, जिला – छिंदवाड़ा पं. जे. एन. एम. चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर से एम. बी. बी. एस., गाँधी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल से निश्चेतना विशेषज्ञ की उपाधि पहली कविता १९९४ में प्रकाशित एवं प्रसारित … आकाशवाणी, दूरदर्शन से १०० से ज्यादा कविताएँ प्रसारित, नाट्य लेखन टेली फिल्म, सीरियल का लेखन एवं निर्माण /पटकथा […]

रतीनाथ योगेश्वर

आम आदमी की आज भी सबसे बड़ी जरूरत रोटी है. लेकिन इस पूँजीवादी व्यवस्था की साजिश देखिए कि  अब ये रोटी भी उसकी पहुँच से दूर होने के कगार पर पहुँच गयी है. आखिर आम आदमी क्या करे? लेकिन यही आम आदमी जब अपने पर आ जाता है तब उसे रोक पाना नामुमकिन हो जाता […]

वन्दना शुक्ला

हमारे समय के कहानीकारों में वन्दना शुक्ला अब एक सुपरिचित नाम है। इधर की पत्र-पत्रिकाओं में वन्दना ने अपनी कहानियों के जरिये अपनी एक सुस्पष्ट पहचान बना ली है। आज पहली बार पर प्रस्तुत है वन्दना शुक्ला का की लम्बी कहानी ‘किस्सों में कोलाज’ का एक अंश।   चौथा किस्सा   मै चला जा रहा था एक […]

विजेंद्र

 (चित्र: पॉल रॉब्सन) पॅाल रॉब्सन अमरीकी अश्वेत विश्वविख्यात गायक। पूरे विश्व में अश्वेतों की मुक्ति के लिये संघर्ष करने वाले अद्वितीय योद्धा संगीतकार। ‘हियर आई स्टैण्ड’ उनकी प्रसिद्ध कृति है जिसमें उनके जीवन के अनेक पक्ष तथा अश्वेतों के बारे में विचारधारात्मक  गंभीर विचार विमर्श है। अश्वेतों की मुक्ति के लिये संघर्ष करने वाले वह […]

अमीर चंद वैश्य

करुणामूलक सात्विक क्रोध की कविताएँ  अमीर जी हर महीने एक संग्रह पर पहली बार के लिए विशेष तौर पर समीक्षा लिख रहे हैं। इस कड़ी में आप अशोक कुमार तिवारी, नित्यानन्द गायेन और सौरभ राय पर अमीर जी की समीक्षाएं पहले ही पढ़ चुके हैं। इसी कड़ी में इस बार प्रस्तुत है शंभू यादव के […]

रणविजय सिंह सत्यकेतु

रणविजय सिंह सत्यकेतु हमारे समय के चर्चित कहानीकार हैं।  सत्यकेतु का एक कहानी संग्रह ‘अकथ’ भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित हो चुका है। इनकी कहानियों में हम वह देख सकते हैं जिसके बारे में हम आम तौर पर कल्पित तक नहीं कर पाते। अपनी सूक्ष्म दृष्टि से ऐसे छोटे-छोटे विषयों को  कहानी में ढाल कर सत्यकेतु […]

महेश चंद्र पुनेठा

हिन्दी दिवस के अवसर पर हमारे कवि मित्र महेश चन्द्र पुनेठा ने यह विचारपूर्ण आलेख पहली बार के लिए लिखा है. महेश जी एक बेहतर शिक्षक भी हैं और शिक्षा के वास्तविक सरोकारों के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए ‘शैक्षिक दखल’ नाम से एक गंभीर और सुरुचिपूर्ण पत्रिका भी निकालते हैं.  महेश ने […]