पंकज पराशर

हमारे समय के कुछ युवा आलोचकों ने समकालीन कहानी पर बेहतर काम किया है। युवा आलोचकों में पंकज पराशर एक ऐसा ही नाम है जिन्होंने शिद्दत से इस काम को शुरू किया है। इसी क्रम में पंकज ने हमारे समय की चर्चित कहानीकार अल्पना मिश्र की कहानी ‘स्याही में सुरखाब के पंख’ पर यह विस्तृत […]

अल्पना मिश्र

  हिन्दी कहानी के क्षेत्र में अल्पना मिश्र ने थोड़े ही समय में अपनी एक मुकम्मल पहचान बना ली है। अभी-अभी अल्पना ने अपना पहला उपन्यास लिख कर पूरा किया है। इस उपन्यास में इन्होंने उस समस्या को बड़ी खूबसूरती से उठाया है जो हमारे समय का सच तो है लेकिन जिस पर बात करना आम […]

सीमा आज़ाद

जन्म- ५-८-१९७५शिक्षा- एम. ए मनोविज्ञान इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबादकार्य-  दस्तक नये समय की, हिन्दी द्वैमासिक पत्रिका का सम्पादनमानवाधिकार संगठन पी. यु. सी. एल की संगठन सचिवनिवास- इलाहाबाद किसान और मजदूर आज भी भारत के सर्वाधिक उपेक्षित वर्ग हैं। ये ही वे वर्ग हैं जिनके हाथों से भारत के विकास की लकीरें खींची गयी हैं। खदान मजदूर […]

चैतन्य नागर

  आम तौर पर जहां लोग देश और दुनिया के तमाम राजनीतिक, सामाजिक और व्यक्तिगत संकटों का कारण और समाधान बाहरी तरीकों और माध्यमों में ढूंढते हैं, वहीं चैतन्य इनकी मनौवैज्ञानिक जड़ों और उपचारों की पड़ताल में लगे रहते हैं। उनका मानना है कि सार्वजनिक बदलाव की कोई भी कोशिश तभी कामयाब होगी जबकि वह […]

अमीर चन्द वैश्य

आज बीस अगस्त को कवि त्रिलोचन का जन्म दिन है। त्रिलोचन जी ने हिन्दी में सॉनेट लिखने की परम्परा की शुरुआत की। त्रिलोचन के इस सॉनेट विधा पर वरिष्ठ आलोचक अमीर चन्द जी ने एक आलेख लिखा है जो पहली बार के पाठकों के लिए त्रिलोचन के जन्मदिन पर विशेष रूप से प्रस्तुत है।     […]

अमीर चंद वैश्य

वरिष्ठ आलोचक अमीर चन्द वैश्य पहली बार के लिए हर महीने एक कविता संग्रह पर समीक्षा लिखेंगे।  इस कड़ी की शुरुआत हम पहले ही कर चुके हैं, जिसमें अभी तक आपने सौरव राय और अशोक तिवारी के कविता संग्रहों पर अमीर जी की समीक्षा पढ़ चुके हैं। इसी क्रम में इस महीने के हमारे उल्लेख्य […]

बसन्त त्रिपाठी

जन संस्कृति मंच, दुर्ग-भिलाई द्वारा  30 जून 2013 को आयोजित बुद्धिलाल पाल के कविता संग्रह राजा की दुनिया पर आयोजित चर्चा-गोष्ठी में बसंत त्रिपाठी द्वारा दिए गए वक्तव्य का लिखित संशोधित रूप पहली बार के पाठकों के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।      मित्रों, बुद्धिलाल पाल के नए संग्रह ‘राजा की दुनिया’ पर एक […]

विमलेश त्रिपाठी

बक्सर, बिहार के एक गांव हरनाथपुर में जन्म (7 अप्रैल 1979 मूल तिथि)। प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही।प्रेसिडेंसी कॉलेज से स्नातकोत्तर, बीएड, कलकत्ता विश्वविद्यालय में शोधरत।देश की लगभग सभी पत्र-पत्रिकाओं में कविता, कहानी, समीक्षा, लेख आदि का प्रकाशन।सम्मानसांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से काव्य लेखन के लिए युवा शिखर सम्मान।भारतीय ज्ञानपीठ का नवलेखन पुरस्कार, सूत्र […]

अंजू शर्मा

शुक्रवार साहित्यिक वार्षिकी,  आलोचना त्रैमासिकी, परिकथा, देशज समकालीन, कृत्या, जनसंदेश टाइम्स (लखनऊ), डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट (लखनऊ), नयी दुनिया (जबलपुर), नेशनल दुनिया, शोधदिशा, ऋचा साहित्यिक पत्रिका (डालमिया ग्रुप), शब्दशिल्पी (सतना), सरिता (दिल्ली प्रेस),  द फैक्ट ऑफ़ टुडे आदि पत्र-पत्रिकाओं में कवितायेँ, लेख नियमित प्रकाशित!                           […]

रमेश यादव

जन्मः 5 जून,1973 गांवः महदीउल,ज़िला तब बनारस,अब चंदौली,उत्तर प्रदेश। स्कूल शिक्षा: गाँव में ही जहाँ अब खिचड़ी खिलायी जा रही, तब न बैठने का टाट होता न भवन। खुला आसमान ही अपना सब कुछ रहा। अभाव और  अव्यवस्था से परिपूर्ण। शिक्षाः महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से 2005 में ‘बिहार की हिन्दी पत्रकारिता और  नक्सलवादी आन्दोलन’ पर […]