सुनीता

इतने दिनों बाद भी प्रेमचंद क्यों प्रासंगिक बने हुए हैं कुछ इसी की तहकीकात में युवा कवियित्री सुनीता ने यह संस्मरण कभी ऐसे ही लिखा था। आज प्रेमचंद जयंती के अवसर पर प्रस्तुत है यह संस्मरण।   विमाता,विमाता ही क्यों…? जिस क्षण बचपन के अँगनाई में पहला कदम बढ़ाया था। उस दम माँ का सीना गर्व से प्रफुल्लित हो उठा था। […]

सलमान रिज़वी आज़मी

 सलमान रिज़वी आज़मीजन्म स्थान- आजमगढ़शिक्षा- मास्टर्स इन कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज़म ( मुंबई विश्वविद्यालय )पत्रकारिता करते हुए देश के कई न्यूज़ चैनलों के साथ कार्यरत रह चुके हैं सामाजिक मुद्दों पर लेखनफ़िलहाल विदेश में दूसरी नौकरी से जुड़े हैं कभी कश्मीर की खूबसूरती को देख कर एक मुग़ल बादशाह ने कहा था- ‘अगर दुनिया में कहीं स्वर्ग […]

क्षमा शंकर पाण्डेय

क्षमा शंकर पाण्डेय का जन्म २८ मार्च १९५५ को उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले के नियामतपुर कलाँ ग्राम में हुआ।  सम्प्रति आजकल भदोही के ज्ञानपुर के काशी नरेश स्नातकोत्तर राजकीय महाविद्यालय में हिन्दी के एसोसिएट प्रोफ़ेसर एवं विभागाध्यक्ष हैं।     क्षमा शंकर पाण्डेय एक कवि हैं साथ ही आलोचक भी। इधर इन्होने कुछ ललित निबन्ध लिखे हैं। […]

अमीर चन्द वैश्य

युवा कवि अशोक तिवारी के दो संकलन प्रकाशित हुए हैं। उनके दूसरे संकलन ‘मुमकिन है’ की समीक्षा पहली बार के  लिए लिखी है वरिष्ठ आलोचक अमीर चन्द वैश्य ने। आप सब के लिए प्रस्तुत है यह समीक्षा। कलात्मक स्थापत्य की लोकधर्मी कविताएँ समकालीन हिन्दी कविता के सामने एक प्रश्न उपस्थित रहता है कि वह राजसत्ता का समर्थन करे […]

कन्सतान्तिन कवाफ़ी

(चित्र : कन्सतान्तिन कवाफ़ी) वरिष्ठ कवि अनिल जनविजय ने यूनानी कवि कन्सतान्तिन कवाफ़ी की कुछ कविताओं के बेहतरीन अनुवाद किए हैं।  पहली बार के पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं ये कविताएँ।  आशा है,  ये कविताएँ आप सब को पसन्द आएँगी।  सीढ़ियों पर उन बदनाम सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था जबतभी पल भर को झलक देखी […]

जवरीमल्ल पारख

जन संस्कृति मंच के ‘द ग्रुप’ द्वारा ऑस्कर अवार्ड पर अभी हाल ही में रामजी तिवारी की पुस्तक ‘यह कठपुतली कौन नचावे’ प्रकाशित की गयी। यह किताब फिल्म समीक्षकों एवं जानकारों द्वारा बहुत सराही गयी। इसी किताब पर प्रस्तुत है जवरीमल पारख की यह समीक्षा।     यह कठपुतली कौन नचावेः ऑस्कर अवार्ड की राजनीति जन […]

शिवकुटी लाल वर्मा

मित्रों, कल यानी १८ जुलाई २०१३ को ११ बजे दिन में हमारे शहर के वरिष्ठ कवि शिवकुटी लाल वर्मा का निधन हो गया। शिवकुटी लाल जी एक कवि होने के पहले एक बेहतरीन इंसान थे। उनकी सहजता एवं विनम्रता के हम कायल थे। श्रद्धांजलिस्वरुप हम पहली बार पर यह पोस्ट लगा रहे हैं, जिसे मैंने सोचा तक नहीं […]

विजेन्द्र

प्रख्यात आलोचक शिवकुमार मिश्र जी का २०-२१ जून २०१३ की आधी रात को निधन हो गया। ‘स्मृति शेष’ के अंतर्गत शिवकुमार जी पर वरिष्ठ कवि विजेन्द्र जी का संस्मरण हम पहली बार के पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं।         स्मृति शेष: डा0 शिवकुमार मिश्र     प्रख्यात लोकधर्मी तथा मार्क्सवादी समीक्षक डा0 शिवकुमार मिश्र अब हमारे […]

प्रेमचन्‍द गांधी

तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझती हुई यह ‘स्त्री की अदम्य जिजीविषा’ ही है जिसने हमारी दुनिया को इस कदर खूबसूरत बनाए रखा है। लेकिन सवाल यह है कि उसकी जिजीविषा की तह में कितने लोग झाँक पाते हैं? यह कवि है जो इस दुनिया में शिद्दत से प्रवेश करता है। और देखता है कि कैंसर के रोग से […]

नित्यानन्द गायेन

  बोधि प्रकाशन जयपुर से कवि राज्यवर्द्धन के सम्पादन में ग्यारह कवियों की कविताओं का एक संकलन ‘स्वर एकादश’ नाम से आया है। इस संग्रह पर युवा कवि नित्यानन्द गायेन ने एक समीक्षा लिखी है जो पहली बार के पाठकों के लिए प्रस्तुत है।   एक रंग ग्यारह सुर   ‘स्वर-एकादश’  में  ग्यारह कवियों की […]