रविशंकर उपाध्याय

जन्म-१२ जनवरी १९८५, बिहार के कैमूर जिले में, शिक्षा  – काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से, स्नातक और परास्नातक (हिंदी), वर्तमान समय में यहीं से कुंवर  नारायण की कविताओं पर शोधरत…  परिचय, युवा संवाद, जनपथ, संवदिया, दैनिक जागरण आदि  पत्र पत्रिकाओं में कवितायें एवं आलेख प्रकाशित… हिंदी विभाग की पत्रिका “संभावना” के आरंभिक तीन  अंको का सम्पादन …. […]

आग्नेय

‘लॉन्ग नाइन्टीज‘ और  कविता पर बहस के क्रम में अभी तक आप पढ़ चुके हैं विजेंद्र जी  और अमीर चन्द्र वैश्य जी के आलेख. इसी कड़ी में प्रस्तुत है कवि, सम्पादक आग्नेय जी का आलेख   लॉन्ग नाइन्टीज : पूर्वज हिन्दी कविता का उच्छिष्टयदि तुम अपने युग की कृतज्ञता को हासिल करना चाहते हो, तुम्हें […]

सुन्दर ‘सृजक’

वास्तविक नाम- सुन्दर साव 25 मई 1978 को पश्चिम बंगाल के उत्तर चौबीस परगना के नैहाटी(ऋषि बंकिम चन्द्र के जन्मस्थली) क्षेत्र में जन्म। कलकत्ता विश्वविद्यालय से 1997 स्नातक (जीव विज्ञान); 2002 स्नातकोत्तर(हिन्दी में), अंग्रेजी में भी स्नातक की विशेष डिग्री तथा इग्नू से अनुवाद में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा।साहित्य,अनुवाद, संगीत व फ़िल्म में रुचि। जून,2011 से ब्लॉग […]

कमल जीत चौधरी

कमलजीत चौधरी युवा कविता का नया स्वर है। यह स्वर विसंगतियों को भलीभांति पहचानता है। ज्यादा में कम होने को महसूस करता है। बहुत समय में कम होने को पहचानता है। प्रतिवर्ष रस्म की तरह होने वाले स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस आयोजनों की हकीकत भी समझता है . दरअसल जनता का अब हर दिन […]

अमीर चन्द वैश्य

‘लांग नाईंटीज‘ जैसे नवगढ़ित टर्म पर हो रहे हो-हल्ले के बीच ‘पहली बार‘ पर हमने विजेंद्र जी के आलेख के साथ कविता पर बहस की एक शुरुआत की थी. उसी कड़ी में आज प्रस्तुत है वरिष्ठ आलोचक अमीर चन्द वैश्य का यह आलेख, जिसमें अमीर जी ने कविता की लोकधर्मी परम्परा पर शिद्दत से विचार […]

विजेंद्र

वागर्थ के दिसंबर अंक में ‘लॉन्ग नाइन्टीज’ जैसे एक नवगढ़ित टर्म पर वरिष्ठ कवि विजेंद्र जी का यह सुविचारित आलेख हम ‘पहली बार’ पर प्रस्तुत कर रहे हैं। बिना किसी टिप्पणी के सीधे यह लेख आपके लिए विशेष तौर पर प्रस्तुत है। आज की हिंदी आलोचना  का गिरता स्तर                मैं कई बार कह चुका हूँ कि खराब आलोचना खराब कविता से ज्यादा खतरनाक […]

प्रेम शंकर सिंह

(चन्दन पाण्डेय)    फरेबी इश्क़ की दास्तान (चन्दन पांडेय की कहानियां) चन्दन पांडेय ख्यातिलब्ध युवा कहानीकार है. ‘भूलना’ नाम से एक संग्रह पहले ही प्रकाशित हो चुका है. अभी हाल ही में दूसरा संग्रह ‘इश्क़ फरेब’ नाम से प्रकाशित हुआ है. इस संग्रह में कुल तीन कहानियां हैं- सिटी पब्लिक स्कूल, शहर की खुदाई में […]

चिंतामणि जोशी

आज साहित्यिक पत्रिकाओं की जहां एक ओर बहुतायत है वहीं अन्य जरूरी विषयों पर पत्रिकाएं इक्का-दुक्का ही दिखाई पड़ती हैं. व्यक्ति और समाज के साथ राष्ट्र को भी एक दिशा देने में इस तरह की पत्रिकाएं अहम् भूमिका निभातीं हैं. शैक्षिक दखल ऐसी ही पत्रिका है जो शैक्षिक नवाचारों पर दृष्टिपात करती है. वस्तुतः शैक्षिक […]

विश्व लोकधर्मी कवियों की श्रृंखला

विश्व लोकधर्मी कवियों की श्रृंखला ‘पहलीबार’ में विश्व के लोकधर्मी कवियों की श्रृखंला पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार दे रहे हैं। इसे हम अपने पाठकों तक पहुँचाने के लिये बहुत दिनों से उत्सुक थे। पर संभव यह अभी हो पा रहा है। विजेंद्र ने हमारे आग्रह पर विश्व के प्रख्यात लोकधर्मी कवियों पर यह श्रृंखला […]