शैलेन्द्र जय

युवा कवि शैलेन्द्र जय का पूरा नाम शैलेन्द्र कुमार श्रीवास्तव है. इनका जन्म ४ फरवरी १९७१ को प्रयाग में हुआ. इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विधि स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की. और आजकल इलाहाबाद के सिविल कोर्ट में कार्यरत हैं. इन्होंने कविताओं के अलावा कुछ नाटक भी लिखे हैं. इनकी कवितायें विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई […]

भगवत रावत: एक बार फिर आऊँगा

  ‘अनहद’ जनवरी २०१२ अंक में समालोचन स्तंभ के अंतर्गत कवि भगवत रावत पर आलेख और उनकी नवीनतम कविता प्रस्तुत की गयी थी. भगवत दादा की कविता आप पहले ही पढ़ चुके हैं. श्रद्धांजली के क्रम में आज प्रस्तुत है कवि केशव तिवारी का भगवत दादा पर लिखा गया आलेख.    केशव तिवारी भगवत रावत […]

भगवत रावत

२५ मई २०१२ का मनहूस दिन. हम सबके अजीज कवि भगवत रावत आज नहीं रहे. हमारे अग्रज कवि मित्र केशव तिवारी ने जब यह सूचना मुझे दी तो मैं हतप्रभ रह गया. विगत कई वर्षों से जिस जीवट से वे जिंदगी के लिए मौत से जूझ रहे थे वह अप्रतिम था और इसीलिए जब यह […]

अमीर चंद्र वैश्य

अपने गाँव धरमपुर में कवि विजेंद्र समकालीन हिन्दी कविता में लोकधर्मी कवियों में विजेंद्र का नाम अग्रगण्य है. अब तक उनके १८ काव्य संकलनों, २ काव्य नाटकों के अलावा २ चिंतन प्रधान पुस्तकें एवं ३ डायरियां प्रकाश में आ चुकी है. आज भी अपने सर्जनात्मक कर्म में वह लीन हैं. ऐसे कवि से मेरा साक्षात्कार […]

अल्पना मिश्र

हिन्दी के नए कहानीकारों में अल्पना मिश्रा ने अपने कहन के ढंग, छोटी छोटी चीजें जिस पर आम तौर पर हमारा ध्यान नहीं जाता के सूक्ष्म वर्णन और किस्सागोई के द्वारा हमारा ध्यान सहज ही आकृष्ट किया है. अल्पना को कहानी लिखने के लिए अतीत की खोह में नहीं जाना पडता बल्कि वे हमारे समय […]

वंदना शर्मा

कविता की दुनिया में वंदना शर्मा एक सुपरिचित नाम है. वंदना शर्मा की कविताएँ अपने अलग तेवर और शिल्प के चलते सहज ही पहचान में आ जाती हैं. वे ‘कहने के असीम साहस के साथ’ अपनी बातें रखती हैं और अपनी कविताओं में स्त्री समाज की विडंबनाओं को इस बेबाकी से उजागर करती हैं कि […]

महेश चन्द्र पुनेठा

अटूट और असंदिग्ध जनपक्षधरता के कवि: विजेंद्र कोई अगर मुझसे कविवर विजेंद्र की एक और सबसे बड़ी विशेषता के बारे में पूछे तो मेरा एक वाक्य में उत्तर होगा- विजेंद्र अटूट और असंदिग्ध जनपक्षधरता के कवि हैं। उनकी जनपक्षधरता का परिचय इस बात से ही चल जाता है कि जब अज्ञेय की जन्म शताब्दी वर्ष […]

राकेश कुमार उपाध्याय:

मार्कण्डेय जी पर विशेष प्रस्तुतीकरण के क्रम में तीसरी कड़ी के रूप में आज राकेश उपाध्याय का आलेख ‘रचनाकार मार्कण्डेय’    रचनाकार मार्कण्डेय रचना का सन्दर्भ समाज से होता है या कह सकते हैं कि हर रचना समाज सापेक्ष होती है . रचना की उपादेयता तभी संभव है जब वह समाज की संरचना को सही […]

प्रणय कृष्ण: मार्कण्डेय: स्मरण में है आज जीवन

मार्कन्डेय जी लेखक होने के साथ साथ एक बेहतर इंसान भी थे. अपने समीप आने वाले किसी भी व्यक्ति से मार्कन्डेय जी जिस सहजता से मिलते और आव-भगत करते थे वह आमतौर पर इतनी बड़ी कद-काठी के लेखकों के जीवन व्यवहार में प्रायः नदारद मिलता है. नयी पीढ़ी से वे हमेशा अत्यंत उत्साह से मिलते […]