रवि भूषण पाठक

गांगेय प्रदेश चुनाव 2012 भय और श्रद्धा के निमित्‍त शायद पुरानों की तरह ही निर्धारित थे यहॉ आदमी नहीं जाति रहते थे कभी कभी मूल गोत्र टोला गुट भी ये सांपों को पूजते थे बिना पर्यावरण की चिंता किए यद्यपि कई के बाप बेटे मॉ डँसे गए थे पर निरपराध सांपों को भी कुचल डालते […]

रेखा चमोली

रेखा चमोली रेखा चमोली का जन्म 8 नवम्बर, 1979 उत्तराखण्ड के कर्णप्रयाग में हुआ। रेखा ने प्राथमिक से ले कर उच्चशिक्षा उत्तरकाशी में ही ग्रहण की। इसके बाद इन्होंने बी. एस-सी. एवम एम. ए. किया। वागर्थ, बया, नया ज्ञानोदय, कथन, कृतिओर, समकालीन सूत्र, सर्वनाम,  उत्तरा,  लोकगंगा आदि साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं प्रकाशित। साथ ही राज्य स्तरीय […]

अरुण माहेश्वरी

अकेलों की नयी दुनिया ‘टाईम’ पत्रिका के ताजा अंक (12 मार्च 2012) में ऐसी दस बातों का ब्यौरा दिया गया है जो “आपकी जिंदगी को बदल रही है”।  इनमें पहली बात है – अकेले जीना। परिवार परम्परा के बाहर ऐसा एकाकी जीवन जिसमें किसी संतति का स्थान नहीं होता। अमेरिका समेत विभिन्न विकसित देशों के […]

वंदना शुक्ला

वन्दना शुक्ला ने प्रस्तुत आलेख ‘अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ के अवसर के लिए भेजा था। लेकिन होली की व्यस्तताओं और और इधर उधर की भागदौड़ के कारण यह लेख प्रकाशित नहीं कर पाया था। आलेख पढ कर ऐसा लगा कि यह तो आज के दौर में कभी भी प्रासंगिक है। और इसे ‘पहली बार’ के अपने […]

अमरकान्त जी को ज्ञानपीठ पुरस्कार

13 मार्च 2012 का दिन इलाहाबाद के साहित्यिक इतिहास में एक अविस्मरणीय दिन के रूप में याद किया जायेगा। इसी दिन ज्ञानपीठ दिल्ली छोड़कर लेखक के शहर इलाहाबाद आया और वर्ष 2009 का ज्ञानपीठ पुरस्कार वरिष्ठ कहानीकार और हम सबके दादा अमरकान्त जी को दिया गया। इलाहाबाद संग्रहालय का ब्रजमोहन व्यास सभागार पूरी तरह खचाखच […]

मार्कण्डेय जी

मार्कण्डेय जी की ख्याति आमतौर पर एक कहानीकार की रही है लेकिन उनके कवि रूप से लोग कम ही परिचित हैं। ‘सपने तुम्हारे थे’ और ‘यह धरती तुम्हें देता हॅू’ जैसे काव्य संग्रह उनके कवि रूप के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। कविताओं की उनकी बेहतर समझ ‘कथा’ के सम्पादन में स्पष्ट रूप से दिखायी पड़ती थी। […]

गायत्री प्रियदर्शिनी

गायत्री प्रियदर्शिनी का जन्म 30 जून 1973 को उत्तर प्रदेश के बदायूं में हुआ। एम. ए. करने के पश्चात प्रियदर्शिनी ने भीष्म साहनी के साहित्य में जनजीवन की अभिव्यक्ति विषय पर अपना शोध कार्य पूरा किया। सम्प्रति आजकल बदायॅू के ही एन. एम. एस. एन. दास पी. जी. कॉलेज के हिन्दी विभाग में अस्थायी प्रवक्ता […]

संतोष अलेक्स

संतोष अलेक्स की पहचान एक बेहतर अनुवादक की रही है. लेकिन वे एक बेहतरीन कवि भी हैं. अपनी भाषा मलयालम में कविताई करने के साथ-साथ संतोष हिंदी में भी बेहतर कवितायेँ लिख रहे हैं. लोक और अपनी मिट्टी से जुड़ाव संतोष की कविताओं में सहज ही देखा और महसूस किया जा सकता है. ‘मिट्टी की […]

प्रतुल जोशी

पोनुंग पार्टी अभी सो रही है पोनुंग पार्टीबेख़बर, अलमस्त,प्रातः की इस नव बेला मेंजब सूरज अपनी ज़िम्मेदारी निभाताउठ जाता है बहुत सबेरेयहां देश के इस भू-भाग में(जिसका नामसूर्य के ही एक पर्यायवाची के नाम पररख दिया थाकिसी ने वर्षों पहले)रात भर रही होंगीनृत्य में मशगूलवर्ष के यह चार दिनआते हैंइन सबके हिस्सेजब कोई नहीं कहताकि […]