राम जियावन दास बावला.

शुभ शुभ, शुभ नया साल हो. बासल बयार ऋतुराज के सनेस देत गोरकी चननिया के अचरा गुलाल होखेत खरीहान में सिवान भर दाना-दाना चिरई के पुतवो न कतहु कंगाल होहरियर धनिया चटनिया टमटरा के मटरा के छीमीया के गदगर दाल हो नया नया भात हो सनेहिया के बात हो की एही बिधि शुभ शुभ, शुभ नया साल हो सोहन लाल […]

अरुण माहेश्वरी

रवीन्द्रनाथ की आध्यात्म-आधारित विश्व-दृष्टि यह रवीन्द्रनाथ के जन्म का 150वां वर्ष है। सांस्कृतिक रूप में सजग भारत के किसी भी व्यक्ति को रवीन्द्रनाथ ने आकर्षित न किया हो, ऐसा संभव नहीं है। ऊपर से, यदि आप बंगाल के निवासी है तो रवीन्द्रनाथ की उपस्थिति का अहसास निश्चत तौर पर आप पर बना ही रहेगा। रवीन्द्रनाथ […]

अदम गोंडवी

अदम गोंडवी का वास्तविक नाम राम नाथ सिंह था. अदम का जन्म गोंडा जिले के परसपुर के आटा गाँव में २२ अक्टूबर १९४७ को हुआ. कबीर जैसी तल्खी और जनता के दिलो दिमाग में बस जाने वाली शायरी अदम की मुख्य धार और उनकी पहचान थी. जन कवि नागार्जुन की तरह ही अदम ने जनता और उसके राजनीतिक संबंधो को अपना काव्य विषय बनाया और सच कहने से कभी नहीं हिचके. जनवादी प्रतिबद्धता के साथ वे जिन्दगी की अंतिम सांस तक जुड़े रहे और लेखकीय स्वाभिमान के साथ जीते रहे. १९९८ में अदम को मध्य प्रदेश सरकार ने इन्हें दुष्यंत कुमार सम्मान से पुरस्कृत किया. अदम के प्रमुख एवं चर्चित गजल संग्रह हैं- ‘धरती की सतह पर’ और ‘समय से मुठभेड़’ लीवर सिरोसिस की बीमारी से जूझते हुए १८ दिसंबर २०११ को अदम का निधन हो गया.  अदम के प्रति श्रद्धांजलि स्वरुप प्रस्तुत हैं कुछ गजलें जो मुझे बहुत प्रिय हैं       तुम्हारी फाईलों में गाँव का मौसम गुलाबी  है तुम्हारी फाईलों में गाँव का मौसम गुलाबी  हैमगर ये आंकड़े झूठे  हैं ये दावा किताबी है उधर जम्हूरियत के ढोल पिटे जा रहे हैं वोइधर […]

विजय गौड

होम वर्क गणित के एक सवाल को हल करते हुएन जाने कितने ही सवालों को कर रहे होते हैं हल,हाशिये में छुट जा रहे होते हैंजोड़ घटाव गुणा और भागफल भागफल का मतलबभाग्यफल तो होता ही नहीं मेरी बेटी,बेशक कर्मफल कर्मफल गीता में भी पढ़ सकती हो,पर गीता की तरह, कर्म किये जा फल की […]

नीलाभ

इस दौर में हत्यारे और भी नफ़ीस होते जाते हैंमारे जाने वाले और भी दयनीय वह युग नहीं रहा जब बन्दी कहता थावैसा ही सुलूक़ करो मेरे साथजैसा करता है राजा दूसरे राजा से अब तो मारा जाने वालामनुष्य होने की भी दुहाई नहीं दे सकताइसीलिए तो वह जा रहा है मारा अनिश्चय के इस […]

भरत प्रसाद

शेक्सपियर चित्र- शेक्सपियर, (गूगल से साभार)   काल और प्रेम (अनुवादक – नगेन्द्र) वज्र धातु हो या प्रस्तर हो या दुर्दम सागर, .ये हैं नतसिर सभी सामने क्रूर काल के . तो कैसे वह रूप सहेगा उस प्रहार को ?जिसका लघु अस्तित्व फूल सा मृदु -कोमल है. मधु-वासंती वात आह, कैसे झेलेगी ? बर्फीली ऋतुवों […]

उमेश चन्द्र पन्त

उमेश चन्द्र पन्त का जन्म 30/10/1985 को उत्तराखंड के  पिथौरागढ़ जिला के गंगोलीहाट के चोढीयार ग्राम में हुआ. शिक्षा स्नातक तक. उमेश की कहीं भी प्रकाशित होने वाली ये पहली कवितायेँ हैं.  रूचि-कवितायेँ पढ़ना एवम लिखना ,सिक्का-संग्रह, तबला वादन, संगीत उमेश की कविताओं में स्पष्ट रूप से काव्य तत्त्व देखे जा सकते हैं. किसी भी कवि की तरह प्रेम में […]

अरुण माहेश्वरी

भारतीय वामपंथ के समक्ष कुछ जरूरी मुद्दे: वामपंथ के पुनर्गठन का एक प्रस्ताव {“आत्मालोचना क्रियात्मक और निर्मम होनी चाहिए क्योंकि उसकी प्रभावकारिता परिशुद्ध रूप में उसके दयाहीन होने में ही निहित है। यथार्थ में ऐसा हुआ है कि आत्मालोचना और कुछ नहीं केवल सुंदर भाषणों और अर्थहीन घोषणाओं के लिए एक अवसर प्रदान करती है। […]