युसूफ कवि

तेलुगु के युसूफ कवि  की यह कविता पसमांदा समाज की हकीक़त को बयां करती है . युसूफ कवि अव्वल कलमा आपको यकीं  तो ना आये शायद  लेकिन हमारी समस्याओं का सिरे से कहीं जिक्र ही नहीं  अब भी, एक बार फिर से, उनकी दसवीं या  ग्यारहवीं  पीढ़ी  जिन्होंने खोई थी  अपनी शानो-शौकत  बात कर रही है हम सब के नाम पर   क्या इसी को कहते हैं अनुभव की लूट? सच तो यही है- नवाब, मुस्लिम,   साहेब, तुर्क- जिनको भी ख़िताब किया जाता  है ऐसे, आते हैं उन वर्गों से  जिन्होंने खोई अपनी सत्ता, जागीर, नवाबी और पटेलिया शान-शौकत लेकिन तब भी सुरक्षित कर ली उन्होंने, कुछ निशानियाँ उस गौरव की जबकि हमारी  जिंदगियां सिसकती रही हमारे हाथों और पेट के बीच हमारे पास तो कभी कुछ महफूज करने को था ही नहीं   […]

संतोष कुमार चतुर्वेदी

 भाई  बिमलेश त्रिपाठी ने अपने  ब्लॉग ‘अनहद’  पर मेरी तीन कवितायें अभी हाल ही में  प्रकाशित थीं.   अपनी  उन्हीं कविताओं को  मैं आपसे साझा कर रहा हूँ. इन कविताओं पर आपकी बहुमूल्य एवं बेबाक  प्रतिक्रियाओं का इंतजार तो रहेगा ही। संतोष कुमार चतुर्वेदी पानी का रंग गौर से देखा एक दिनतो पाया कि पानी का भी एक रंग हुआ करता है अलग बात है यह कि नहीं मिल पाया इस रंग को आज तककोई मुनासिब नाम अपनी […]

बलभद्र

दूसरी किश्त बलभद्र लेवा … … बाकी अब त बतिये कुल्हि बदलत जात रहल बा. पुरान साड़ी आ दू-अढाई सै रुपिया ले के शहर-बाजार में, लेवा त ना, बाकिर लेवे अइसन चीज सिये के कारोबार शुरू बा. बस एह में फोम रहेला पतराह, एकदम बिच में. सीआई, फराई, काट-डिज़ाइन एकदम लेवा अस. अब त नयो-नयो कपड़ा के […]

बलभद्र

लेवा ई कवनो पूंजीपति घराना के उत्पाद ना ह कि एकरा खातिर कवनो सरकारी भा गैरसरकारी योजना भा अभियान चली. ई  गाँव  के गरीब मनई आ हदाहदी बिचिलिका लोग के चीज ह. एकदम आपन. अपना देहे-नेहे तैयार कइल. एकरा खातिर कवनो तरह के अरचार-परचार ना कब्बो भइल बा, ना होई कवनो टी वी भा अखबार में. ई गाँव के मेहरारुन के […]

संतोष कुमार चतुर्वेदी

 संतोष  कुमार चतुर्वेदी चुप्पी एक मानचित्र है चुप्पी जिसे बांटा जा सकता है मनमाने तरीके से लकीर खींच कर चुप्पी गोताखोर की गहरी डुबकी है उफनते समुद्र में जिसके बारे में नहीं बता सकता किनारे पर खड़ा कोई व्यक्ति कि अचानक कहाँ से निकल पड़ेगा गोताखोर चुप्पी किसी डायरी का कोरा पन्ना है जिस पर मन की सियाही से चित्रकारी की जा सकती […]

अब्राहम लिंकन

उसे सिखाना   (अब्राहम लिंकन का अपने पुत्र के शिक्षक के नाम एक पत्र ) उसे पढ़ाना कि संसार में दुष्ट होते है तो आदर्श नायक भी  कि जीवन में शत्रु हैं तो मित्र भी  उसे बताना कि श्रम से अर्जित एक रुपया बिना श्रम के मिले पांच रूपये से भी अधिक मूल्यवान है  उसे सिखाना कि पराजित कैसे हुआ जाता है   यदि तुम उसे सिखा सको तो सिखाना कि ईर्ष्या से दूर कैसे रहा जाता है नीरव अट्टहास का गुप्त मंत्र भी उसे सिखाना तुम करा सको तो उसे पुस्तकों  के  आश्चर्य लोक क़ी सैर अवश्य कराना  किन्तु उसे  इतना  समय भी देना कि […]

हरीश चन्द्र पाण्डे

हरीश चन्द्र पाण्डे हमारे समय के ऐसे महत्वपूर्ण कवि हैं जिनके बिना आज की कविता का कोई वितान नहीं बन सकता. वे बड़े सधे अंदाज में जिन्दगी के विविध  पहलुओं को अपनी कविता में  रूपायित करते हैं. पाण्डे जी की कविता दृश्य की निर्मिती करती है कुछ इस तरह के दृश्य की जिसमें कोई कांट-छांट नहीं की जा सकती. दिसंबर १९५२ में उत्तराखंड के अल्मोड़ा जनपद […]

केदार नाथ सिंह

मेरी भाषा के लोग                                                                                                                                  मेरी सड़क के लोग हैं सड़क के लोग सारी दुनिया के लोग पिछली रात मैंने एक सपना देखा कि दुनिया के सारे लोग  एक बस में बैठे हैं  और हिंदी बोल रहे हैं फिर वह पीली-सी बस  हवा में गायब हो गई और मेरे पास बच गयी  सिर्फ मेरी हिंदी  जो अंतिम सिक्के की तरह  हमेशा बच जाती है मेरे पास  हर मुश्किल में  कहती वह  कुछ नहीं पर बिना   कहे भी जानती है मेरी जीभ  कि उसकी  खाल पर चोटों के कितने निशान हैं कि […]